बँटवारे के बाद देश के सिस्टम की बदहाली बयान करती है मेरठ के पिंटू राय चौधरी की कहानी

मेरठ। बँटवारे के वक्त पाकिस्तान से आये शरणार्थियों को देश की जनता ने तो कलेजे से लगाया मगर तब के अफसरों की तानाशाही ने शरणार्थियों के हकों पर डाके डालकर उन्हें हमेशा के लिए बेबसी में जीने को मजबूर कर दिया। मेरठ के पिंटू राय चौधरी की कहानी बँटवारे के बाद देश के सिस्टम की बदहाली बयान करती है जिनका पुनर्वास हुआ भी और नही भी। पचास बरस से पिंटू राय चौधरी अपने हक के लिए अफसरों की चौखट पर है मगर इंसाफ अभी भी दूर की कौड़ी है।

 

मेरठ

 

पाकिस्तान में हिंदुओं पर जब कहर बरसने लगा तो 1964 में देश के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने हिन्दुओं को भारत आकर बसने का न्यौता दिया था। पूर्वी पाकिस्तान के नुआखाली जिले से वीरेन्द्र कुमार राय चौधरी अपना बसा-बसाया घर और प्रिंटिंग का कारोबार छोड़कर अपने परिवार के साथ उसी दौरान भारत आये। उन्हें पहले मध्यप्रदेश के माना रिफ्यूजी कैंप में रखा गया और फिर मेरठ के हस्तिनापुर ट्रांजिट कैंप में लाकर उनको बसा दिया गया। 1968 में पुनर्वास के लिए उनके परिवार को एक घर और एक दुकान के अलावा 4 हजार रूपये का सरकारी अनुदान मिला था।

मगर 1972 में परिवार को मोदीनगर भेजने के नाम पर उनका घर-दुकान छीन लिया गया। बाबजूद इसके उनको कभी मोदीनगर भी नही भेजा गया और न ही पुनर्वास के नाम पर दिये गये घर-दुकान ही वापस मिले। 1974 में वीरेन्द्र कुमार राय चौधरी चल बसे। परिवार खेतों में मजदूरी करके झौंपड़ी में रहकर अपने दिन काटने लगा। इस दौरान उनके बेटे पिंटू राय चौधरी ने सैकड़ो बार केन्द्र और राज्य की सरकारों से उनके हिस्से की सम्पत्ति लौटाने की फरियाद की मगर मामला सिफर रहा।

बता दें कि केन्द्र ने सहायता एवं पुनर्वास विभाग को 1980 में राज्य के अधीन कर दिया और राज्य ने 1993 में विभाग को राजस्व विभाग में मर्ज कर लिया। पुनर्वास विभाग के राज्य में मर्ज होने से पहले ही हस्तिनापुर में अवैध तरीके से शरणार्थियों के लिए आरक्षित सम्पत्तियों को अफसरों ने बेच डाला और अपनी जेबें गर्म कर ली। पिंटू राय चौधरी देश के प्रधानमंत्री से लेकर राष्ट्रपति तक की चौखट पर फरियाद करने गये मगर जॉच के नाम पर भ्रष्टाचारियों की करतूतें दबाने का खेल चलता रहा। उन्होने राज्य सरकार से शिकायत की तो जिला प्रशासन ने उन्हें पुनर्वासित लिखकर सरकार को चिठ्ठी भेज दी।

वहीं नतीजा यह है कि 14 दफा से ज्यादा पिंटू राय चौधरी यूपी के मुख्यमंत्री से उनके शिकायत पोर्टल पर अपनी शिकायत भेज चुके है। कई मर्तबा मुख्यमंत्री से भी मिलकर फरियाद की। मगर 50 साल की जद्दोजहद के बाद भी घर-दुकान नही मिल सका है। 63 साल की उम्र में कई बीमारियों से जूझ रहे पिंटू राय चौधरी अब उस दिन का अफसोस करते है जब उनके पिता नेहरूजी के वायदे पर सब कुछ छोड़कर चले आये थे।