अगर धार्मिक स्थल मथुरा में घूमना है तो जरूर पढ़ें यह आलेख, बेहतरीन जगहों की खास जानकारी

अगर धार्मिक स्थल मथुरा में घूमना है तो जरूर पढ़ें यह आलेख, बेहतरीन जगहों की खास जानकारी
  • ये आर्टिकल मूलतः Travel Junoon पर प्रकाशित किया गया है।

उत्तर प्रदेश में आध्यात्मिक
नगरी मथुरा (Mathura Travel) में देशभर से पर्यटक आते हैं। होली जैसे उत्सवों में तो
विदेशी सैलानी भी बड़ी संख्या में मथुरा (Mathura Travel) पहुंचते हैं। आप मथुरा में
परिवार के साथ जाएं या अकेले इस जगह घूमने के लिए सबसे अनुकूल महीना फरवरी, मार्च,
अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर है। मथुरा में 20 से भी ऐसे टूरिस्ट प्लेस हैं जिन्हें जरूर
देखना चाहिए। स्थानीय जगहों को आप दिन में किसी भी वक्त घूम सकते हैं। मथुरा में अगर
आप ये जगहें देखना चाहते हैं तो आपको यहां दो या तीन दिन रुकना होगा।

 कृष्ण जन्मभूमि मंदिरः कृष्ण जन्म भूमि मथुरा का एक प्रमुख धार्मिक स्थान है। इस जगह को भगवान कृष्ण का जन्म स्थान माना जाता है। भगवान श्री कृष्ण की जन्मभूमि का ना केवल राष्द्रीय स्तर पर महत्व है बल्कि वैश्विक स्तर पर जनपद मथुरा भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान से ही जाना जाता है। आज वर्तमान में महामना पंडित मदनमोहन मालवीय जी की प्रेरणा से यह एक भव्य आकर्षण मन्दिर के रूप में स्थापित है। पर्यटन की दृष्टि से विदेशों से भी भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए यहां प्रतिदिन आते हैं। भगवान श्रीकृष्ण को विश्व में बहुत बड़ी संख्या में नागरिक आराध्य के रूप में मानते हुए दर्शनार्थी आते हैं।

विश्राम घाटः आध्यात्मिक नगरी में घाटों का अलग ही महत्व होता है। हरिद्वार, वाराणसी आदि शहरों की पहचान इसी से है। विश्राम घाट द्वारिकाधीश मंदिर से 30 मीटर की दूरी पर, नया बाजार में स्थित है। यह मथुरा के 25 घाटों में से एक प्रमुख घाट है। विश्राम घाट के उत्तर में 12 और दक्षिण में 12 घाट हैं। ऐसी मान्यता है कि यहां अनेक संतों ने तपस्या की एवं इसे अपना विश्राम स्थल भी बनाया। विश्राम घाट पर यमुना महारानी का अति सुंदर मंदिर स्थित है। यमुना महारानी जी की आरती विश्राम घाट से ही की जाती है। विश्राम घाट पर संध्या का समय और भी आध्यात्मिक होता है।

प्रेम मंदिरः प्रेम मंदिर वृंदावन में स्थित है। इसका निर्माण जगद्गुरु कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा के मंदिर के रूप में करवाया गया है। इस मंदिर में अगर आप संध्या में आते हैं तो आपको यहां किसी सपने जैसे दृश्य दिखाई देगा। लेजर लाइट से गीतों के जरिए दिखाई जाने वाली आकृति, रंग बिरंगी रोशनी से सजी मंदिर की दीवारें और यहां की अद्भुत संरचना आपका मन मोह लेगी। प्रेम मन्दिर का लोकार्पण 17 फरवरी को किया गया था। इस मन्दिर के निर्माण में 11 वर्ष का समय और लगभग 100 करोड़ रुपए की धन राशि लगी है। इसमें इटैलियन करारा संगमरमर का प्रयोग किया गया है और इसे राजस्थान और उत्तरप्रदेश के एक हजार शिल्पकारों ने तैयार किया है।

इस्कॉन मंदिरः प्रेम मंदिर से कुछ ही दूरी पर इस्कॉन मंदिर स्थित है। यह दूसरी कुछ मीटर की ही होगी। इस्कॉन मंदिर के प्रांगण में कदम रखते ही आपको एक शांति का अनुभव होगा। आप प्रेम मंदिर की तरह यहां भी काफी देर तक बैठकर मंत्रमुग्ध हो सकते हैं। यहां हरे रामा हरे कृष्णा का उच्चारण आपको भाव विभोर कर देगा। दिलचस्प बात ये है कि यहां विदेशी सैलानियों की अच्छी खासी मौजूदगी रहती है। आप यहां उन्हें भक्ति गीतों को गाते देख सकते हैं। कई विदेशी सैलानी भक्ति रस में डूबकर नृत्य करते हैं, आप उन्हें देख खुद को रोक नहीं पाएंगे।