पंचायती राज विभाग

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तेज हो चुकी है। पंचायती राज विभाग के द्वारा त्रिस्तरीय सामान्य निर्वाचन से जुड़ी आरक्षण नीति और शासनादेश के विषय में प्रेस वार्ता की। अपर मुख्य सचिव पंचायती राज मनोज कुमार सिंह ने पूरी जानकारी दी। जिसमें आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर कई बातों को विस्तृत तरीके से समझाया गया।

महिला आरक्षण में होंगे बड़े बदलाव
महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर सबसे पहले उन जिलों पर ध्यान होगा, जहां महिला आरक्षण नहीं है। इसके बाद शेष बचे जिलों को अनारक्षित किया जाएगा। यह आरक्षण एससी-ओबीसी के क्रम में होगा।

जो पद पहले से आरक्षित नहीं, उन्हें वरीयता
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मनोज कुमार सिंह के द्वारा यह बात जाहिर की गई कि इस बार आरक्षण की वरीयता अलग तरीके से होगी। जो पद पहले से आरक्षित नहीं है, उन्हें वरीयता दी जाएगी।

2015 की स्थिति 2021 में नहीं
विभाग ने अधिक जानकारी देते हुए यह भी बताया कि 2015 की आरक्षण वाली स्थिति बदल जाएगी। जो आरक्षण 2015 में किसी सीट पर था, वह 2021 में नहीं होगा। इस तरह से उन सभी जिलों का आरक्षण रोटेशन कर दिया जाएगा। आरक्षण पर प्रकाश डालते हुए बताया गया कि 20% सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित होती है। इसी के आधार पर शासन की तरफ से स्थिति जारी की जाएगी।

New Project 3 पंचायत चुनाव: आरक्षण की अधिसूचना जारी, इस बार बहुत कुछ है नया

इस पूरे मामले में प्रस्ताव 20 फरवरी तक तैयार किया जाएगा। इसके साथ ही किसी भी तरह की आपत्ति पर बात 2 मार्च से 8 मार्च तक होगी। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने आरक्षण की नियमावली में बदलाव किया। जिसके बाद चुनाव आयोग ने आगे की प्रक्रिया शुरू की है। जल्दी उत्तर प्रदेश में पंचायती चुनाव होने हैं। इसके लिए तैयारी तेजी से शुरु हो गई है।

प्रदेश में अलग-अलग पदों की स्थिति पर नजर डालें तो

  1. प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्ष के कुल पदों की संखया 75 है। जिसमें से अनुसूचित जाति को 16 पद आरक्षित हैं। इनमें से 6 पद महिलाओं को आरक्षित होंगे। पिछड़ी जाति के 20 आरक्षित पदों में 7 पद महिलाओं को आरक्षित हैं। महिलाओं को 25 पद आरक्षित हैं। साथ ही जिला पंचायत अध्यक्ष के लिए 27 पद अनारक्षित हैं।
  2. ब्लॉक् प्रमुख के लिए कुल 826 पद हैं। जिसमें से अनुसूचित जनजाति के लिए 5 पद, अनुसूचित जाति के लिए 171 पद और पिछड़ी जाति के लिए 223 पद आरक्षित हैं।
  3. ग्राम प्रधानों के लिए कुल संख्या 58,194 की है। इसमें से अनुसूचित जनजाति के लिए 330, अनुसूचितजाति के लिए 12,045 और पिछड़ी जाति के लिए 15,712 पद आरक्षित हैं।

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