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मेघालय के राज्यपाल ने कहा, किसानों की बात मान ले सरकार, अहंकार में ज्यादाती करना गलत

सत्यपाल मलिक

बागपत। मेघालय के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि केन्द्र सरकार को किसानों की बात मान लेनी चाहिए। अहंकार में किसानों के साथ ज्यादाती करना गलत है। उन्होंने कहा कि अगर एमएसपी को कानूनी मान्यता दे दी जाए तो किसान मान जाएंगे। सरकार ऐसा करने की बजाय गलत रास्ता अपना रही है।

सत्यपाल मलिक ने कहा कि राज्यपाल का काम चुप रहना है। मगर, मेरी आदत है कि मेरे सामने जो कुछ होता है मैं उस पर चुप नहीं रहता। बोलता हूं। वह रविवार को अपने गृह जनपद में एक अभिनंदन समारोह में शामिल होने आए थे। उन्होंने कहा, मैंने किसानों के आंदोलन को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से बात की है।

सरकार को यह सुझाव दिया है कि आंदालन कर रहे किसानों को खाली हाथ मत भेजना। किसानों की बात मान लेना, इन पर ब प्रयोग करना भी ठीक नहीं होगा। किसान अगर सरकार के दरवाजे से वापस गए तो इस बात को अगले 300 सालों तक नहीं भूलेंगे।

उन्होंने किसानों की समस्याओं को जोरदार तरीके से उठाया। बोले, प्रदेश में किसानों का बुरा हाल है। किसानों की आर्थिक स्थिति धीरे-धीरे खराब होती जा रही है। इसके दूसरी तरफ सरकारी अफसर और कर्मचारियों का वेतन हर साल बढ़ रहा है। बोले, मैं किसान परिवार से हूं, इसलिए किसानों की दिक्कतों को ठीक से जानता और समझता हूं।

उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि किसान जहां चाहे वहां अपनी फसल बेच सकता है। यह नई बात नहीं है। यह कानून पिछले 15 साल से है। किसानों के लिए यह काम आसान नहीं है। अगर उत्तर प्रदेश का किसान किसी दूसरे राज्य में फसल बेचने जाता है तो उस पर लाठीचार्ज हो जाता है। बोले, जिस देश में किसान और नौजवान नाराज रहते हैं वह देश कभी तरक्की नहीं कर सकता।

अंबानी की फाइल पर दस्तखत करने से इंकार कर दिया

सत्यपाल मलिक ने कहा कि जब वह जम्मू कश्मीर के राज्यपाल थे। तब अंबानी की एक फाइल उनके पास दस्तखत के लिए आई थी। साथ में 150 करोड़ रुपये की रिश्वत भी थी। प्रधानमंत्री के कुछ करीबी उस फाइल पर दस्तखत करने के लिए कह रहे थे। फाइल में तमाम कमियां थीं। मैंने दस्तखत करने से इंकार कर दिया और फाइल वापस कर दी। प्रधानमंत्री को यह बात बताई तो उन्होंने मेरा समर्थन किया।

धमकियों के बीच हटवाई धारा 370

सत्यपाल मलिक ने कहा कि कश्मीर से धारा 370 हटाने के लिए उन्हें भेजा गया था। तमाम धमकियों के बीच वहां से धारा 370 हटाई गई। सरकार के इस कदम के दौरान पूरे राज्य में अमन-चैन बना रहा। कश्मीर कार्यकाल के दौरान राज्य की बेहतरी के लिए जो कुछ भी बेहतर लगा, उन्होंने किया।

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