September 18, 2021 9:46 am
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वाराणसीः सावन में भी बंद रहता है काशी में स्थित महादेव का ये मंदिर, जानिए वजह

वाराणसीः सावन में भी बंद रहता है काशी में स्थित महादेव का ये मंदिर, जानिए वजह

वाराणसीः सावन के महीने में ऐसा कोई दिन नहीं जाता जिस दिन काशी के किसी भी मंदिर में भगवान शिव पर जलाभिषेक न हो। सिर्फ सावन ही नहीं, बल्कि पूरे साल यहां भक्तों का तांता लगा रहता है। सावन के मौके पर लाखों की सख्या में यहां भक्त बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आते हैं।

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आज हम आपको काशी के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो पूरे साल बंद रहता है। साल में सिर्फ एक दिन ये मंदिर खोला जाता है। वह दिन शिवरात्रि है, जब काशी में महादेव का ये मंदिर भक्तों के लिए खुलता है। ये मंदिर काशी विश्वनाथ के पिता महेश्वर महादेव का है।

महेश्वर का काशी विश्वनाथ मंदिर

भगवान शंकर के पिता हैं महेश्वर महादेव!

बाबा विश्वनाथ मंदिर से करीब आधे किलोमीटर दूरी पर स्थित शीतला गली में ये मंदिर मौजूद है। माना जाता है कि जब मां गंगा और काशी का दुनिया में कोई अस्तित्व नहीं था तब इस मंदिर को यहां स्थापित किया गया था। मान्यता है कि जब देवता काशी आए और यहां उन्हें पिता को न देख निराशा हुआ। मन में भाव आया कि इस जगह पर उनके माता-पिता का भी वास होना चाहिए। देवताओं ने परमपिता महेश्वर का आह्वान करिया और यहां पर भगवान शिव के पिता महेश्वर महादेव को स्थापित किया गया।

महेश्वर का काशी विश्वनाथ मंदिर

साल में एक दिन खुलता है मंदिर का कपाट

सिंधिया घाट के पास स्थित इस मंदिर के पुजारी सुरेश शर्मा ने मंदिर के बारे में बताते हुए कहा कि ये मंदिर जमीन से करीब 30 फीट नीचे है। शिवलिंग के ऊपर एक बड़ा सा छेद है उसी से लोग दर्शन करते हैं। मंदिर में अंदर जाने के रास्ते को साल में बस एक दिन शिवरात्रि वाले दिन खोला जाता है। उस दिन इस मंदिर में विधिवत रुद्राभिषेक किया जाता है।

महेश्वर का काशी विश्वनाथ मंदिर

सबसे प्राचीन मंदिर है महेश्वर महादेव का

पुजारी ने बताया कि भक्तों की सुरक्षा के लिहाज से ये मंदिर बंद रहता है। उन्होंने बताया कि मंदिर का रास्ता काफी पुराना और जर्जर है। इसले साल में इसे बस एक बार खोला जाता है। बाकि पूरे साल शिवलिंग के ऊपर बने छेद से ही महेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया जाता है।

महेश्वर का काशी विश्वनाथ मंदिर

काशीखंड में भी है मंदिर का जिक्र

पुजारी सुरेश शर्मा ने ये भी बताया कि काशी में महेश्वर महादेव का मंदिर और सिद्धेश्वरी माता का मंदिर सबसे प्राचीन मंदिर है। यहां मंदिर में शिवलिंग के ऊपर पंचमुखी शेषनाग का छत्र भी स्थापित है। इसका जिक्र काशी खंड में भी है।

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