महाशिवरात्रि पर महा पूजन की विधि, जानिए कैसे करें महादेव को प्रसन्न

आदित्य मिश्र, लखनऊ: महाशिवरात्रि 11 मार्च को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान शंकर का भक्त पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ पूजन अर्चन करेंगे। प्रत्येक पूजा करने की एक निश्चित विधि और समय होता है।

महाशिवरात्रि के पूजन को लेकर Bharatkhabar.com के पत्रकार आदित्य मिश्र (Aditya Mishra) ने आचार्य राजेंद्र तिवारी से विशेष बातचीत की। इस दौरान आचार्य जी ने पूजन विधि से लेकर महाशिवरात्रि की कथा तक का विस्तृत वर्णन किया।

महादेव को प्रसन्न करने का पर्व है शिवरात्रि

आचार्य राजेंद्र तिवारी के अनुसार जिस प्रकार हम मां भगवती को प्रसन्न करने के लिए नवरात्रि का व्रत रखते हैं। भगवान श्री कृष्ण की आराधना करने के लिए जन्माष्टमी का पर्व मनाते हैं। हनुमान जी को प्रसन्न करने के लिए हनुमान जयंती और भगवान भैरव को खुश करने के लिए भैरवाष्टमी मनाते हैं। उसी प्रकार महादेव को प्रसन्न करने के लिए सभी भक्त महाशिवरात्रि मनाते हैं।

रात्रि पूजन का है महत्व

वैसे तो भगवान की पूजा करने का कोई निश्चित समय नहीं होता। आप भगवान को कभी भी याद कर सकते हैं। महाशिवरात्रि के लिए रात्रि का वक्त काफी सही माना गया है। इस बार महाशिवरात्रि गुरुवार को पड़ेगी, इसके साथ ही उस दिन धनिष्ठा नक्षत्र भी है। धनिष्ठा नक्षत्र प्रेम और सद्भाव का प्रतीक है। इसीलिए यह महाशिवरात्रि काफी अलग और महत्वपूर्ण है।

तीन अलग-अलग पहर में पूजन

पूजन के लिए रात्रि काल में भगवान शंकर की आराधना की जाती है। प्रथम पहर में भगवान की आराधना उनके गणों के साथ होती है। भगवान के प्रमुख गण नंदी, वीरभद्र जी और कुबेर जी हैं। पूजन के लिए दूसरा पहर रात्रि 9:29 से 12:31 तक होगा। इस दौरान भगवान शंकर की पूजा आदिशक्ति देवी के साथ की जाती है। महादेव के पूजन में आदिशक्ति का विशेष महत्व है।

 

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पूजन का तीसरा पहर रात्रि 12:31 से 3:32 तक होगा। इस दौरान महादेव की पूजा भूत प्रेतों के साथ होगी। भोलेनाथ सभी के लिए अपने दरबार को खुला रखते हैं। इसमें भूत प्रेत, मनुष्य, जीव जंतु, देवता सभी शामिल हैं। पूजन का चतुर्थ पहर रात्रि 3:32 से 6:34 तक होने वाला है। इस पहर में भगवान भोलेनाथ की पूजा सप्त ऋषि और देवताओं के साथ की जानी चाहिए। भगवान की पूजा किसी भी काल में कर सकते हैं। दिवस में भी पूजन का महत्व है लेकिन रात्रि के पूजन का विशेष महत्व है।

पूजन के लिए शिवलिंग का करें निर्माण

आचार्य जी के अनुसार अगर आपके आसपास कोई शिवलिंग या भगवान शिव का मंदिर है तो वहां जाकर आप पूजा अर्चना कर सकते हैं। ऐसा ना होने की स्थिति में आप घर पर गाय के गोबर या साटी के चावल से शिवलिंग बनाकर पूजा कर सकते हैं। पूजन के लिए पूर्व और उत्तर दिशा सबसे उपयुक्त है। पूर्व में देवताओं का वास है और उत्तर में कुबेर जी का वास है। ऐसे में इन 2 दिशाओं की ओर शिवरात्रि के दिन बैठकर पूजा की जानी चाहिए।

पूजन में तिलक का विशेष अर्थ

माथे पर तिलक करना आस्था को प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करता है। अलग-अलग पूजन के लिए अलग-अलग टीके लगाए जाते हैं। जैसे आदिशक्ति की पूजा के दौरान गोल टीका और भगवान शंकर की पूजा के दौरान त्रिपुंड माथे पर लगाया जाता है। त्रिपुंड को लगाने के लिए चंदन या कंडे की राख का इस्तेमाल सबसे उपयुक्त है।

 

 

पौराणिक कथाओं में दर्ज है महाशिवरात्रि

महाशिवरात्रि को मनाने के पीछे अलग-अलग कथाएं मौजूद हैं। शिव पुराण के अनुसार इसी दिन मां पार्वती और महादेव का विवाह हुआ था। वहीं स्कंद पुराण के अनुसार अलग कथा है। भगवान ब्रह्मा और विष्णु जी के अहंकार को तोड़ने के लिए भोलेनाथ ने एक तरकीब निकाली थी। उन्होंने एक स्तंभ के ऊपरी छोर का पता लगाने के लिए ब्रह्मा जी को भेजा और निचले छोर का पता लगाने के लिए विष्णु जी को भेजा।

जब विष्णु जी को छोर का पता नहीं चला तो वह मध्य में आकर बैठ गए। ब्रह्मा जी भी कुछ देर तक ऊपर जाते रहे लेकिन वह भी वापस लौट आए। पूछने पर ब्रह्मा जी ने बताया कि उन्हें ऊपरी छोर का पता चल गया है। ब्रह्मा जी के झूठ बोलने के कारण स्तंभ से भगवान शंकर प्रकट हुए और उनके पांचवे शीश को काट दिया।

ब्रह्मा जी को काफी पीड़ा हुई, अन्य देवताओं के साथ मिलकर उन्होंने भगवान शंकर का शिवलिंग बनाकर पूजन किया। जिस दिन भगवान शंकर का पूजन हुआ, यह फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी थी। भगवान ने प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी की पीड़ा हर ली और तभी से सब को आशीर्वाद दिया कि इस दिन जो सच्चे मन से उन्हें याद करेगा सबकी मनोकामनाएं वह पूरी करेंगे।

कांवड़िए करते हैं जलाभिषेक

महाशिवरात्रि के दौरान अलग-अलग तीर्थों में भारी संख्या में कांवड़िए पहुंचते हैं। वह सभी अपने साथ गंगाजल लेकर आते हैं। पैदल चलते हुए महादेव के दरबार में सभी उनका जलाभिषेक करते हैं। आस्था का यह बड़ा पर्व पूरे देश में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए सभी अपना सर्वस्व न्योछावर कर देते हैं।

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