mango पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बने चार बुजुर्ग, जानें कैसे बचाई आम के पेड़ की जान

कोरोना काल में आपने ऐसे किस्से बहुत सुने होंगे जहां हजारों लोगों ने मिसाल पेश कर कई लोगों की जानें बचाई। लेकिन आज हम एक ऐसा किस्सा बताने जा रहे हैं, जहां एक आम के पेड़ की जान बचाने के लिए चार बुजुर्ग सामने आ गए।

बुजुर्गों ने बचाया पेड़

अगर हम कहें कि एक आम के पेड़ की जान की कीमत 10 हज़ार रुपये है, तो शायद आप चौंक जायेंगे। लेकिन ये सच है क्योंकि ये कीमत चुकाकर ही चार बुज़ुर्गों ने एक पेड़ की जान बचाई है। जिसे उन्होंने बचपन से अपनी आंखों के सामने बड़ा होते देखा है, और उसकी छांव में घंटों समय बिताया है।

10 हज़ार में बेचा आम का पेड़

दरअसल मामला झाबुआ से 12 किलोमीटर दूर स्थित ग्राम खरड बड़ी के हुंड़ा फलिए का है। जहां एक ग्रामीण ने अपनी जमीन को एक हरे भरे आम के पेड़ समेत बेच दिया। ग्रामीण ने हीरालाल नाम के व्यक्ति को पेड़ 10 हज़ार में बेचा। जिसके बाद हीरालाल लकड़ी के लिए पेड़ काटने पहुंचा।

जब इसका पता गांव के चार बुजुर्गों नूरा, सकरिया, हीरा और रामा को लगा तो वो हीरालाल के पास पहुंचे। जहाँ उन्होंने पेड़ काटने का कारण पूछा। जिसपर हीरालाल ने कहा कि मैंने ये पेड़ खरीद लिया है।

पर्यावरण संरक्षण की मिसाल..

इसके बाद चारों बुज़ुर्गों ने पर्यावरण संरक्षण की मिसाल पेश करते हुए उस पेड़ को उतने में ही वापिस खरीद लेने की बात कही। जिसपर हीरालाल मान गया, और चारों बुजुर्गों ने 2500-2500 रुपये जमा कर 10 हज़ार रुपये उसे दे दिए।

पेड़ ही बारातियों का ठिकाना

बता दें कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले शादी समारोह के दौरान बारात पेड़ के नीचे लगती है, क्योंकि वहां सामुदायिक भवन या इस तरह की कोई अन्य सुविधा नहीं है। ऐसे में पेड़ ही बारातियों का ठिकाना बनता है। इसके अलावा ग्रामीणों की पंचायत भी यहां लगती है, ऐसे में ग्रामीणों के लिए पेड़ उनके जीवन का अहम हिस्सा है।

एक पेड़ से छांव भी मिलेगी और फल भी 

चारों बुजुर्गों ने बताया कि ये आम का पेड़ सालों पुराना है, और उनकी आंखों के सामने बड़ा हुआ है। ऐसे में हम उसे अपनी आंखों के सामने कैसे कटते देख लेते। उन्होंने कहा कि एक पेड़ की जान बचाने के लिए 10 हज़ार रुपये कोई बड़ी बात नहीं हैं। क्योंकि पेड़ को बड़ा करने में सालों लग जाते हैं, इससे छांव भी मिलेगी और बच्चे फल भी खाएंगे।

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