लखनऊ: निजीकरण के विरोध में विद्युत् कर्मचारियों का प्रदर्शन

लखनऊ: सोमवार को राजधानी स्थित शक्ति भवन में बिजली के निजीकरण के विरोध में विद्युत् कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति उत्तर प्रदेश के बैनर तले सैकड़ों विद्युत् कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि मानसून सत्र में विद्युत् अमेंडमेंट बिल 2021 लाया जा रहा है जिसके विरोध में हम पूरे देश में विरोध सभाएं कर रहे हैं। इसी कड़ी में लखनऊ स्थित शक्ति भवन में भी प्रदर्शन किया जा रहा है।

लखनऊ: निजीकरण के विरोध में विद्युत् कर्मचारियों का प्रदर्शन

2003 से ये बिल लाने की कोशिशें हो रही हैं लेकिन..

प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों का कहना है कि साल 2003 से इस बिल को लाने का प्रयास सरकारें करती थीं लेकिन हमारी अपील पर सरकारों ने इसे विड्रा किया। कर्मचारियों का कहना है कि 2021 में इसे पास कराने की कोशिशें तेज़ हैं। कर्मचारियों का कहना है कि हम सार्वजानिक क्षेत्र में गरीबों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराते हैं। सस्ती बिजली केवल सार्वजनिक क्षेत्र में ही उपलब्ध हो सकती है, अडानी-अंबानी और निजीकरण सस्ती बिजली नहीं उपलब्ध करा सकते हैं।

निजीकरण किसी भी चीज़ का हल नहीं

कर्मचारियों का कहना है कि एक तरफ तो देश और प्रदेश की सरकार रोज़गार को बढ़ावा देने की बात कर रही है और दूसरी ओर निजीकरण को बढ़ावा भी दिया जा रहा है। कर्मचारियों ने कहा है कि निजीकरण किसी भी समस्या का हल नहीं है। हमारी सरकार से अपील है कि इस बिल पर पुनर्विचार किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि बिजली का निजीकरण किसी भी हाल में नहीं होना चाहिए।

देशभर में 15 लाख कर्मी अन्दोलंरत

बता दें कि दो घंटे के इस प्रदर्शन में पूरे देश के 15 लाख अधिकारी व कर्मचारी शामिल रहे। उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में चार से छह बजे तक ये विरोध प्रदर्शन किया गया है।

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