September 20, 2021 12:30 pm
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हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शादिशुदा का दूसरे से रिश्ता ‘लिव इन रिलेशन’ नहीं, ‘अपराध’ है

WhatsApp Image 2021 01 20 at 11.15.02 AM हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शादिशुदा का दूसरे से रिश्ता 'लिव इन रिलेशन' नहीं, 'अपराध' है

प्रयागराज। पति पत्नी के मसलों पर सोमवार को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि यदि कोई महिला बगैर तलाक लिए दूसरे व्यक्ति के साथ रह रही है तो वह इस आधार पर अदालत से सुरक्षा पाने की हकदार नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि कृत्य आईपीसी की धारा 494 495 के तहत अपराध है। इस तरत का संबंध लिव इन रिलेशन के दायरे में नहीं आता।

 

आपको बता दें कि याचिकाकर्ता सुरज कुमार और आशा देवी ने कार्ट से अपुरोध किया था कि वे बालिग हैं औ पहले से ही पति पत्नी की तरह रह रहे हैं इसलिए कोई उनके शांतिपूर्ण जीवन में हस्तक्षेप ना करे।

 

यूपी सरकार के वकील ने याचिका का विराध इस आधार पर किया थ कि याचिकाकर्ता आशा देवी पहले से शादीशुदा है और अपने पति महेश चंद्र से तलाक लिए बगैर उसने सुरज कुमार नाम के व्यक्ति के साथ रहना शुरु कर दिया जो अपराध है, इसलिए वह किसी तरह के संरक्षण की पात्र नहीं है।

 

 

न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी और न्यायमूर्ति डॉक्टर वाई के श्रीवास्तव की पीठ ने तथ्यों पर गौर करने के बाद कहा कि आशा देवी अब भी कानूनन महेश चंद्रा की पत्नी है।

 

अदालत ने कहा, ”चूंकि आशा देवी एक शादीशुदा महिला है और महेश चंद्रा की पत्नी है, याचिकाकर्ताओं का कृत्य विशेषकर सूरज कुमार का कृत्य आईपीसी की धारा 494/495 के तहत अपराध है। इस तरह का संबंध ‘लिव इन रिलेशन’ के दायरे में नहीं आता।”

 

इस याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘मौजूदा मामले में तथ्यों के आधार पर याचिकाकर्ताओं के पास संरक्षण पाने के लिए कोई कानूनी अधिकार नहीं है. कानून के विपरीत आदेश जारी नहीं किया जा सकता.’’

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