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क्या आप भी चुनना चाहते हैं IVF प्रक्रिया, तो जरूर ध्यान दें ये पांच बातें

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जब लंबे समय तक कोशिश करने के बाद भी प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं हो पाता तो सबसे पहले कपल्स के दिमाग में यह बात आते हैं कि वहां IVF यानी इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन प्रकिया का सहारा ले । दुनिया भर में फेमस यह प्रक्रिया एक्साइटमेंट के साथ-साथ घबराहट भरी हुई है । यह प्रक्रिया कपल्स को माता-पिता बनने का सुख तो देती है लेकिन यह प्रक्रिया कैसी काम करेगी या 100% सफल होगी यह जरूरी नहीं है । 

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भारत की 10-14% आबादी बांझपन से प्रभावित 

इंडियन सोसाइटी ऑफ असिस्टेड रिप्रोडक्शन द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत में बांझपन से प्रभावित आबादी लगभग 10 से 14 प्रतिशत है। जिस कारण IVF प्रक्रिया एक लोकप्रिय राह बनती जा रही है। यदि आप या आपके आसपास कोई कपल बार-बार कोशिश के बाद प्राकृतिक रूप से माता-पिता बनने का सुख नहीं प्राप्त कर पा रहा है । तो वह आईवीएफ प्रक्रिया को चुनने के बारे में सोच रहा होगा । तो आज हम आप को इस प्रक्रिया को सफल बनाने व आपके मन IVF से जुड़ी घबराहट को दूर करने जा रहे है । जिन्हें आपको ध्यान में रखना चाहिए।

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IVF से जुड़ी सारी जानकारियां एकत्रित करें और सबसे खराब स्थिति के बारे में जानें

इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले आपको सबसे पहले इसका शोध करना जरूरी है साथ ही बांझपन के उपचार क्या है ? उसके लिए क्या-क्या आवश्यक है ? और आप हमशे ध्यान रखें कि बांझपन के उपचार का मतलब आईवीएफ नहीं है । बल्कि पुरुष और महिला के प्रजनन क्षमता के आकलन के आधार पर, यह तय किया जाता है कि अंतर्गर्भाशयी गर्भाधान (IUI), IVF या ICSI उपचार करना है या नहीं। इस बात की 10-15 प्रतिशत संभावना है कि रोगी आईयूआई के साथ सफलतापूर्वक गर्भधारण कर लेते हैं, जो काफी सस्ता विकल्प है।

फैसला लेने के बाद हमेशा सकारात्मक रहे

आईवीएफ प्रक्रिया कराने के बाद कपल को हमेशा सकारात्मक मानसिकता के साथ लक्ष्य पर टिका रहना चाहिए । जब तक वह सफल नहीं हो जाता और बच्चे को गर्भधारण नहीं कर लेता । विश्वास होना बेहद जरूरी है यह संभव है और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैकल्पिक विकल्पों को हमेशा तैयार रखना चाहिए |

आईवीएफ कराने के लिए एक नैतिक IVF केंद्र चुनें

आईबीएस की प्रक्रिया को चुने से पहले आपको अच्छी तरीके शोध करना चाहिए । और उसका चयन करना है। जहाँ सभी प्रोटोकॉल का पालन किया जाता हो और आईसीएमआर और ईएसएचआरई दिशानिर्देशों का पालन करना चाहिए, जो सफलता की संभावना का आश्वासन देता है। एक उपयुक्त समय चुनें और डॉक्टर के दौरे के अनुसार अपने कार्य कार्यक्रम की योजना बनाएं। 

प्रक्रिया को अपनाने से पहले पोषण का रखें विशेष ध्यान 

स्वस्थ वजन बनाए रखना प्रजनन क्षमता की ओर पहला कदम है। ऐसे खाद्य पदार्थों सहित संतुलित आहार लें जो पुरुषों और महिलाओं दोनों के गर्भ धारण करने की क्षमता को बढ़ावा दें। गर्भवती होने के लिए शारीरिक रूप से सक्रिय रहें और स्वस्थ जीवनशैली में बदलाव करें।

5 T का पालन करें – Trust, talent, teamwork, time and treasure

जब आप इस प्रक्रिया को चुनने के अंतिम रूम पर हो तब डॉक्टर पर उनके काम (प्रतिभा) पर भरोसा करें और सफल होने के लिए एक टीम के रूप में उनके साथ काम करें। उपचार के लिए दोनों भागीदारों से प्रतिबद्धता की आवश्यकता होती है और उन्हें उपचार के समय का सख्ती से पालन करना चाहिए। समय से समझौता नहीं किया जा सकता है और यह एक महत्वपूर्ण सफलता कारक है। उपचार महंगा है और इस प्रकार आपको तदनुसार अपने वित्त की योजना बनाने की आवश्यकता है।

आईवीएफ प्रक्रिया की जरूरत क्यों होती है

आईवीएफ प्रक्रिया की  जरूरत तब होती है जब या तो फैलोपियन ट्यूब अवरुद्ध हो जाती है या जब अंडे या शुक्राणु की गुणवत्ता खराब हो । 

 

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