49f0ee65 496f 4f67 98ad 7d6bd164ecb2 हरिद्वार में अगले साल होगा कुंभ मेले का आयोजन, जानें शाही स्नान का महत्व
फाइल फोटो

कुंभ मेला। हिंदू धर्म में कुंभ मेले का बहुत अधिक महत्व है। यह मेला मकर संक्रांति के दिन शुरू होता है। कुंभ मेला चार प्रसिद्व स्थानों पर लगाता है। जिसमें हरिद्वार, प्रयागराज, उज्जैन और नासिक हैं। यहां प्रत्येक स्थान पर हर 12 साल साल बाद कुंभ मेला का आयोजन किया जाता है। इसके साथ ही प्रयागराज में दो कुंभ पर्वों के बीच छह वर्ष के अंतराल में अर्धकुंभ भी होता है। इस बार साल 2021 में कुंभ मेले का आयोजन हरिद्वार किया जा रहा है। जब सूर्य और चन्द्रमा, वृश्चिक राशि में और वृहस्पति, मेष राशि में प्रवेश करते हैं। मकर संक्रांति के होने वाले इस योग को “कुम्भ स्नान-योग” कहते हैं और इस दिन को विशेष मंगलकारी माना जाता है। हरिद्वार कुंभ 2021 का पहला शाही स्नान गुरुवार, 11 मार्च को होगा। इस दिन महाशिवरात्रि रहेगी।

कुंभ से जुड़ी मान्यता-

बता दें कि कुंभ मेले में शाही स्नान का महत्व काफी खास होता है। इस दिन गंगा स्नान करना काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि स्नान करने से व्यक्ति के रोग-विकार, पाप आदि का नाश होता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि शाही स्नान के दिन गंगा में डुबकी लगाने से अमरत्व प्राप्त होता है। इसी वजह से साधु-संत बड़ी और सोने-चांदी की पालकियों के साथ शाही स्नान करने आते हैं। कुंभ के संबंध में समुद्र मंथन की कथा प्रचलित है। समुद्र मंथन में 14 रत्न निकले थे। इन रत्नों में कालकूट विष, कामधेनु, उच्चैश्रवा घोड़ा, ऐरावत हाथी, कौस्तुभ मणि, कल्पवृक्ष, अप्सरा रंभा, महालक्ष्मी, वारुणी देवी, चंद्रमा, पारिजात वृक्ष, पांचजन्य शंख, भगवान धनवंतरि अपने हाथों में अमृत कलश लेकर निकले थे। जब अमृत कलश निकला तो सभी देवता और असुर उसका पान करना चाहते थे। अमृत के लिए देवताओं और दानवों में युद्ध होने लगा। इस दौरान कलश से अमृत की बूंदें चार स्थानों हरिद्वार, प्रयाग, नासिक और उज्जैन में गिरी थीं। ये युद्ध 12 वर्षों तक चला था, इसलिए इन चारों स्थानों पर हर 12-12 वर्ष में एक बार कुंभ मेला लगता है। इस मेले में सभी अखाड़ों के साधु-संत और सभी श्रद्धालु यहां की पवित्र नदियों में स्नान करते हैं।

शाही स्नान का महत्व-

कुंभ मेले में शाही स्नान का महत्व काफी खास होता है। इस दिन गंगा स्नान करना काफी शुभ माना जाता है। मान्यता है कि स्नान करने से व्यक्ति के रोग-विकार, पाप आदि का नाश होता है। साथ ही यह भी माना जाता है कि शाही स्नान के दिन गंगा में डुबकी लगाने से अमरत्व प्राप्त होता है। इसी वजह से साधु-संत बड़ी और सोने-चांदी की पालकियों के साथ शाही स्नान करने आते हैं।

शाही स्नान के दिन – गुरुवार- 11 मार्च 2021 महाशिवरात्रि, सोमवार- 12 अप्रैल सोमवती अमावस्या, बुधवार-14 अप्रैल मेष संक्रांति और वैशाखी, मंगलवार- 27 अप्रैल चैत्र माह की पूर्णिमा।

प्रमुख स्नान के दिन – गुरुवार- 14 जनवरी 2021 मकर संक्रांति, गुरुवार-11 फरवरी मौनी अमावस्या, मंगलवार- 16 फरवरी बसंत पंचमी, शनिवार- 27 फरवरी माघ पूर्णिमा, मंगलवार- 13 अप्रैल चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (हिन्दी नववर्ष), बुधवार- 21 अप्रैल राम नवमी।

 

 

 

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