January 25, 2022 11:13 am
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दैत्यों के खात्मे व साधुओं की रक्षा के लिए हुआ कृष्ण का जन्मदिन

WhatsApp Image 2021 08 30 at 8.25.18 PM दैत्यों के खात्मे व साधुओं की रक्षा के लिए हुआ कृष्ण का जन्मदिन

लखनऊ। रामकृष्ण मठ निरालानगर, लखनऊ में श्री श्री ठाकुरजी की संध्या आरती के पश्चात रामकृष्ण मठ के स्वामी इष्टकृपानन्दजी द्वारा ’’श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा’’ बड़े हर्षोल्लास एवं धार्मिक रीति रिवाज के साथ एवं कोविड महामारी के मद्देनजर सामाजिक दूरी एवं कोविड प्रोटोकॉल के तहत मनायी गयी। इस दौरान पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण भी किया गया।

पूजा की शुरूआत सुबह 4:30 बजे से शंख नाद व मंगल आरती एवं प्रार्थना स्वामी इष्टकृपानन्दजी के द्वारा हुई। सुबह 6:50 बजे भगवद गीता से पाठ भक्ति योग (12 वां अध्याय) और स्वामी इष्टकृपानन्दजी द्वारा श्री कृष्ण वंदना हुई। उसके बाद सुबह 7:15 बजे ’श्रीकृष्ण के नवरूप श्री रामकृष्ण’ पर एक विशेष सतप्रसंग स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा दिया।

श्रीरामकृष्ण ने कहा कि गीता का सार अर्थ है गीता का उल्टा करने से जो होता है-त्यागी अर्थात भगवान को लाभ करने के लिए सर्वप्रकार भोगाशक्ति त्याग करना पड़ेगा। यह वाणी दिखाने के लिए श्रीकृष्ण कलयुग में श्री रामकृष्ण रूप धारण कर आये थे कारण उनके जैसा त्याग न कभी सुना न कभी देखा।

दूसरा, श्रीकृष्ण राधा प्रेम का आस्वादन किया था लेकिन राधिका उनको कितना प्यार करती थीं वो अनुभव नहीं कर सके। वही अनूभूति पूर्ण करने के लिए श्री रामकृष्ण रूप से आये थे एवं श्री रामकृष्ण एक ही शरीर में राधा बनकर एवं दूसरे ओर से कृष्ण बनकर जुगल मिलन का प्रेम अस्वादन किया। तीसरा, भगवद् गीता में जो धर्म समन्वय का वाणी प्रचारित हुआ वह धर्म समन्वय श्री रामकृष्ण अपने जीवन में करके दिखाया।

शाम 6:55 बजे से श्री श्री ठाकुर की संध्या आरती के पश्चात स्वामी इष्टकृपानन्द द्वारा जन्माष्टमी पूजा प्रारम्भ हुई उसके बाद स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा श्रीकृष्ण के जन्म के संबंध में श्रीमद्भागवतम् से प्रवचन दिया गया। प्रवचन देते हुये उन्होंने बताया कि श्रीमद्भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है,जो मेरा दिव्य जन्म एवं कर्म कथा सही ढंग से जानेंगे वह मुक्त हो जायेगा। स्वामी जी ने कहा कि इस कारण आज जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीमद्भागवत में जो कृष्ण जन्म कथा लिखी हुई है उसका चर्चा कर रहा हूँ। वे जन्मरहित होते हुये भी अपनी माया के प्रभाव से प्रकट हो जाते है।

कंस के कारागार में वैसे ही वासुदेव और देवकी की भक्ति से अपने ऐश्वर्य सहित प्रकट हुये थे। दैत्यों के दलन एवं साधुओं की रक्षा करने के लिए आज ही के दिन में वासुदेव नवजात कृष्ण को यमुना पार करके नन्दराज के गृह में स्थानान्तरण किया एवं नन्द पत्नी यशोदा के गर्भजात योगमाया को मथुरा के कारागार में वापस ले आया। श्रीकृष्ण सदा भक्तगणों के हृदय मे विराजमान हैं एवं जो भी उनको दर्शन के लिए व्याकुल होकर प्रार्थना करेंगे वह तत्काल प्रकट हो जायेंगे।

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