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जानिए क्यों मनाया जाता है माघी पूर्णिमा का स्नान पर्व, संगम में भक्तों की डुबकी का महत्व

जानिए क्यों मनाया जाता है माघी पूर्णिमा का स्नान पर्व, संगम में भक्तों की डुबकी का महत्व

प्रयागराज: माघी पूर्णिमा का पर्व आज मनाया जा रहा है। देश के अलग-अलग स्थानों पर लाखों की संख्या में भक्त आस्था की डुबकी लगा रहे हैं। ऐसा ही नजारा प्रयागराज में देखने को मिला जहां भारी संख्या में भक्त संगम में स्नान कर रहे थे।

ब्रह्म मुहूर्त में करते हैं स्नान

सुबह सुबह सूर्योदय से पहले श्रद्धालु स्नान करने पहुंच जाते हैं। मान्यता के अनुसार माघी पूर्णिमा में ब्रह्म मुहूर्त का स्नान ही सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। स्नान के साथ-साथ सभी श्रद्धालु दान पुण्य का काम भी करते हैं। इस दौरान अपनी श्रद्धा के आधार पर सभी ईश्वर के चरणों में अपनी आस्था अर्पण करते हैं।

खत्म होगा 1 महीने का कल्पवास

पिछले 1 महीने से श्रद्धालु संगम क्षेत्र के आसपास और अन्य जगहों पर कल्पवास कर रहे थे। यह प्रक्रिया आज माघी पूर्णिमा में स्नान दान के बाद पूर्ण हो जाएगी। कल्पवास के दौरान बिना कुछ बोले सूर्योदय से पहले पानी में पहुंचना होता है। इसके बाद वहीं पूजा-अर्चना करके भगवान सूर्य की आराधना होती है, इसके बाद आगे का दिन शुरू होता है।

संयम सिखाती है माघी पूर्णिमा

माघी पूर्णिमा का भारतीय सनातन धर्म में अलग महत्व है। पूजा पाठ के अतिरिक्त यह जिंदगी में संयम सिखाता है। एक महीने तक सुबह जल्दी उठना, बिना कुछ बोले गंगा या यमुना में स्नान करना। इसके बाद सूर्योदय होने पर भगवान सूर्य की पूजा करते हुए दिन की शुरुआत करना।

माघी 1 जानिए क्यों मनाया जाता है माघी पूर्णिमा का स्नान पर्व, संगम में भक्तों की डुबकी का महत्व

पूस पूर्णिमा से लेकर माघ पूर्णिमा तक 1 महीने का कल्पवास भी होता है। जो माघी पूर्णिमा के दिन पूर्ण होता है। इस दिन भक्त ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करके दान प्रक्रिया को पूरा करते हैं। हर वर्ष माघ महीने में यह पर्व पूरे संयम और आस्था के साथ मनाया जाता है।

योगी ने किया ट्वीट

इस पर्व के मौके पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी को शुभकामनाएं दी। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि तीर्थराज प्रयाग में माघी पूर्णिमा स्नान, दान एवं यज्ञ का विशेष महत्व है। सभी कल्पवासियों के लिए यह किसी एक पर्व की तरह है। इसके लिए राज्य सरकार ने सारी सुविधाएं और सुरक्षा का इंतजाम कर रखा है।

सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम

भारी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से शासन प्रशासन पूरी सुरक्षा व्यवस्था में लगा हुआ था। इसी को ध्यान में रखते हुए जगह-जगह पर सीसीटीवी कैमरे और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया गया। कंट्रोल रूम बनाकर के पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। इसके साथ ही कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 5000 पुलिस कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।

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