निर्जला एकादशी में व्रत रखने से बनेंगे सभी बिगड़े काम, जानिए क्या है महत्व

लखनऊ: सोमवार को पूरे देश में निर्जला एकादशी मनाई जा रही है। यह हर वर्ष जेष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में एकादशी के दिन मानया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु की अराधना की जाती है। इसे भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दौरान गंगा के घाट पर वाराणसी में भक्तों ने स्नान कर पूजन किया।

सारे पापों का होता है नाश

इस एकादशी व्रत के दिन सारे पापों का नाश हो जाता है, जिंदगी में खुशहाली आती है। भगवान विष्णु का पूजन अर्चन करने से सभी मनोकामना पूरी होती है। इस दिन व्रत रखने से सभी एकादशी का फल एक साथ मिल जाता है।

बिना जल ग्रहण के होता है व्रत

पूरा दिन बिना पानी पिए इस व्रत को रखा जाता है, भगवान की भक्ति में खुद को सराबोर करके ही इस शक्ति को प्राप्त किया जा सकता है। शास्त्र यह भी कहता है कि इस दिन भगवान का स्मरण करने से मृत्यु के बाद भगवान के श्रीचरणों में स्थान मिलता है।

एकादशी का समय 20 जून शाम 4 बजकर 21 मिनट से 21 जून 1 बजकर 31 मिनट तक है। व्रत समापन के बाद पारण के लिए 22 जून को सुबह 5 बजकर 24 के बाद का समय शुभ है।

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