भारत के खेतों में होगा जापानी धान, कैथल में हुआ जापानी राइस मिल का उद्घाटन

नई दिल्ली। अब भारतीय खेतों में जापानी धान उगाया जा सकेगा। इस जापानी धान को भारत में ही प्रोसेस कर जापानी चावल बनाया जाएगा। शुक्रवार को जापानी कारोबारियों, कृषि विशेषज्ञों की उपस्थिति में जापानी धान भारतीय खेतों में रोपा गया और जापानी राइस मिल का उद्घाटन किया गया। जापानी कंपनी ऑस्क निप्पन की हरियाणा के कैथल में शुरू हुई जापानी राइस मिल की क्षमता एक घंटे में 300 किलो जापानी धान को प्रोसेस करने की होगी। शुरूआत में 300 हेक्टेयर रकबे पर जापानी धान रोपा जाएगा।

janpan dhan
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बाद में जापानी धान के रकबे को डेढ़ हजार हेक्टेयर तक बढ़ाया जाएगा। जिसमें जापान से लाया गया धान बोया जाएगा। इस पूरी परियोजना को 2024 तक पूरा कर लिया जाएगा, तब तक भारत के अलग-अलग इलाकों में 13500 हेक्टेयर रकबे पर जापानी धान बोने का लक्ष्य प्राप्त किया जाएगा। हरियाणा के कैथल के अलावा देहरादून और सुंदरनगर इलाकों में भी जापानी धान से जापानी चावल प्रोसेस करने की मिल लगाई जाएगी। इन इलाकों में सफलता के बाद भारत के अन्य राज्यों छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, झारखंड, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश सहित कई राज्यों में भी जापानी धान की खेती की जाएगी। इन राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में काम चल रहा है।

बता दें कि मीडिया से बातचीत में जापानी कंपनी ऑस्क निप्पन के कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि भारतीय खेतों में जापानी धान की खेती के लिए मिट्टी और पानी की जांच की गई थी, जिसमें दोनों को जापानी धान के लिए उपयुक्त पाया गया। साथ ही जापानी धान के लिए उपयुक्त मौसम को देखकर फैसला लिया गया। जापानी धान के कारोबारियों को उम्मीद है कि वे भारतीय खेतों में 6 टन जापानी धान प्रति हेक्टेयर के हिसाब से पैदा कर सकेंगे। परियोजना के पूरा होने के बाद जापानी धान से निकले चावल की लागत 100 रूपये से 150 रुपये प्रति किलो पड़ेगी। प्रति हेक्टेयर उच्च पैदावार के चलते भारतीय किसानों को खासा मुनाफा होगा। इस पूरी जापानी धान परियोजना से करीब 35 हजार भारतीय किसान लाभान्वित होंगे।

एक बार जापानी धान परियोजना पूरी हो जाने के बाद जापानी कृषि विशेषज्ञ भारतीय बासमती चावल को लेकर प्रयास शुरू करेंगे। जिसके अंतर्गत जापानी कृषि तकनीक के उपयोग से बासमती चावल की प्रति हेक्टेयर पैदावार को बढ़ाया जाएगा। जापानी धान के अलावा जापानी कंपनी ऑस्क निप्पन सोयाबीन, पशुपालन, सब्जी उत्पादन सहित कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी प्रवेश करेगी।