्म एक बार फिर उठी राजस्थान में आदिवासी राज्य की मांग

नई दिल्ली। राजस्थान मेंं चुनाव निकत आते ही एक बार फिर आदिवासी राज्य का मुद्दा उठले लगा हैं। जहां एक बार फिर नेताओं की ओर से आदिवासी राज्य की मांग की जा रही हैं। आदिवासी राज्य की मांग करने वालें नेताओं का कहना हैं कि राजस्थान के डूंगरपुर,बांसवाड़ा,प्रतापगढ़ और उदयपुर जिलों को मिलाकर अलग से एक राज्य बनाया जाना चाहिए।

्म एक बार फिर उठी राजस्थान में आदिवासी राज्य की मांग

बता दे कि इस आदिवासी मुद्दें को लेकर पिछले तकरीबन दो महिने से बैठक का सिलसिला चालू हैं और एक लंबे समय से आदिवासी राज्य को बनाए जाने की मांग की जा रही हैं। राजस्थान के केबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा की ओर से एक बार फिर कहा कि अलग से राज्य बनने पर ही आदिवासियों का भला हो सकेगा । मीणा ने कहा कि ” मै सरकार में मंत्री हूं, इसका मतलब यह नहीं है कि मैने अपनी पुरानी मांग छोड़ दी और अपने आप को गिरवी रख दिया “।

मीणा के समर्थक ही इन दिनों आदिवासी जिलों में सक्रिय है ।मीणा ने कहा कि तत्कालीन स्व.भैरोंसिंह शेखावत सरकार के दौरान राज्य में अलग से जनजाति विभाग बनाया गया था । अब भील,मीणा,डामोर,गरासिया और सहरिया आदि आदिवासी जातियों को लेकर अलग से आदिवासी राज्य की परिकल्पना की जा सकती है । उन्होंने कहा कि जब गुर्जर आरक्षण की मांग कर सकते हैं,समानता मंच के जरिये ब्राहम्ण और राजपूत नेता सरकारों में कर्ताधर्ता बन सकते हैं तो मै आदिवासी राज्य की मांग क्यों नहीं कउल्लेखनीय है कि करीब दो वर्ष पूर्व राजस्थान प्रशासनिक सेवा के एक अधिकारी ने विधानसभा चुनाव में भाजपा का टिकट नहीं मिलने पर अलग से आदिवासी राज्य बनाने की मांग करते हुए आंदोलन चलाया था । इस अधिकारी ने युवाओं को एकजुट कर दो सभाएं भी की थी । हालांकि बाद में इस अधिकारी को सरकार की नाराजगी झेलनी पड़ी और सजा के तौर पर उदयपुर संभाग से बाहर तबादला करते हुए कम महत्व के पद पर पदस्थापित कर दिया गया ।

अब विधानसभा चुनाव निकट आते ही इस अधिकारी की महत्वकांक्षा फिर बढ़ने लगी है और ये डूंगरपुर,बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जिलों में युवाओं को सक्रिय करने में जुटा है । भाजपा और कांग्रेस के कई नेता आदिवासी राज्य की मांग को दबे स्वरों में समर्थन दे रहे हैं,लेकिन खुलकर अभी अपनी बात कहने से कतरा रहे हैं ।  बता दे कि राजस्थान मे ंबीजेेपी को अभी हाल ही में हुए चुनावों में हार का सामना करना पड़ा था। इसलिए बीजेपी की ओर से चुनाव में हर संभव कोशिश की जा रही हैं। अब देखना यें होगा कि बीजेपी हार पर मंथन के बाद क्या राजस्थान के रेत में अपना कमल खिला पाएंगी।

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