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NATO के खिलाफ खुलकर सामने आए पुतिन और जिनपिंग, CHINA के साथ RUSSIA तो INDIA के SUPPORT में AMERICA

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रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन विंटर ओलिंपिक्स की इनॉगरेशन सेरेमनी के लिए शुक्रवार को बीजिंग पहुंचे। यहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की।

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इस दौरान उन्होंने ताइवान को चीन का अभिन्न हिस्सा माना। साथ ही ताइवान की किसी भी रूप में स्वतंत्रता के दावे को खारिज कर दिया तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका ने भारत के साथ हिंसक झड़प में शामिल चीनी कमांडर को ओलंपिक में टॉर्च बियरर बनाए जाने पर आपत्ति जताई है। अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका हमेशा से अपने दोस्तों के साथ खड़ा है और वो चीनी अतिक्रमण के खिलाफ भारत का समर्थन करेगा।

विंटर ओलंपिक में सियासी खेल

चीन ने जहां यूक्रेन मसले पर खुलकर रूस का साथ देने का ऐलान किया है, वहीं यह भी कहा है कि बीजिंग और मास्‍को के बीच रिश्‍तों में अब कोई सीमा नहीं होगी और दोनों देश एक-दूसरे का पूरा सहयोग करेंगे। इससे पहले जब अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने चीन में आयोजित विंटर ओलंपिक का राजनयिक बहिष्कार करने का फैसला किया था। तब पश्चिम के देश भारत की ओर देख रहे थे कि उसका रुख क्या होगा। पश्चिम को उम्मीद थी कि जिस तरह से चीन सरहद पर भारत के खिलाफ आक्रामक है, वैसे में भारत भी बहिष्कार करेगा। लेकिन भारत ने पिछले साल आर.आई.सी (रूस, इंडिया, चीन) के विदेश मंत्रियों की बैठक में विंटर ओलंपिक को समर्थन देकर सबको चौंका दिया था।

रूस ‘वन चाइना’ के सिद्धांत का करता है समर्थन

मुलाकात के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि रूस ‘वन चाइना’ के सिद्धांत का समर्थन करता है। बदले में चीन ने भी यूक्रेन के मुद्दे पर अमेरिका के साथ चल रहे तनाव में रूस का समर्थन किया है। दुनिया की दो महाशक्तियों के इस मिलन से ताइवान और यूक्रेन का संकट और गहराने की आशंका है।

साझा बयान में अमेरिका पर साधा निशाना

5300 शब्दों वाले लंबे संयुक्त बयान में रूस और चीन ने एक दूसरे के हितों की रक्षा के लिए सहयोग की बात भी कही । जिसमें उनकी संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और घरेलू मामलों में किसी अन्य देश का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करना शामिल है। इस दौरान चीन ने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह हांगकांग में दंगे भड़का रहा है। साथ ही ताइवान की स्वतंत्रता के मुद्दे को हवा दे रहा है। रूस ने भी कहा कि अमेरिका यूक्रेन में संकट बढ़ा रहा है।

2 साल बाद पुतिन से मिले जिनपिंग

पुतिन इन दिनों यूक्रेन को नाटो में शामिल करने के विरोध पर अमेरिका समेत इस ग्रुप के सभी देशों से टकरा रहे हैं। पश्चिमी देश इस संकट को सुलझाने के लिए राजनयिक प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में जिनपिंग ने उनसे एक रणनीति के तहत मुलाकात की है।

शीतयुद्ध के रास्ते पर न बढ़ें नाटो देश

यह पिछले दो साल में पहली बार है, जब जिनपिंग किसी देश के राष्ट्रपति से रूबरू मिले हैं। माना जा रहा है कि इससे रूस और चीन के संबंध और गहरे होंगे। दोनों नेताओं ने मुलाकात के बाद संयुक्त बयान में कहा कि नाटो देश शीतयुद्ध काल के रणनीतिक रास्ते को छोड़ दें।

रूस ने तैनात किए हैं 1 लाख सैनिक

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन चीन और रूस, दोनों देशों से रणनीतिक संबंधों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। पुतिन ने यूक्रेन सीमा पर एक लाख सैनिक तैनात कर रखे हैं। अमेरिका को शक है कि रूस की मंशा यूक्रेन पर आक्रमण करने की है।

टीवी पर दिखाई गई जिनपिंग-पुतिन मुलाकात

पुतिन की जिनपिंग से मुलाकात रूस के सरकारी टीवी पर भी दिखाई गई। पुतिन रेड कार्पेट पर जिनपिंग से मिलने के लिए आगे बढ़े और उनके स्वागत में हाथ उठाए। जिनपिंग ने दुभाषिए की मदद से कहा- मैं आपको देखकर बहुत प्रसन्न हूं। यह चीन-अमेरिका की प्रतिद्वंद्विता में बदलाव का संकेत भी दे सकता है जिसकी गूंज यूरोप की जगह एशिया में सुनी जाएगी।

पुतिन ने कहा था कारोबार पर चर्चा करेंगे

गुरुवार को चीन की न्यूज एजेंसी शिन्हुआ के साथ एक लेख में पुतिन ने कहा था कि वे जिनपिंग के साथ कारोबार और व्यापार समझौतों पर चर्चा करेंगे। साथ ही वैश्विक आर्थिक मेकेनिज्म बनाने के लिए रणनीतियों की चर्चा करेंगे जिनसे कि एकतरफा प्रतिबंधों के नुकसान को कम किया जा सके। चीन और रूस पहले भी डॉलर में होने वाले कारोबार के प्रभुत्व से रणनीतिक दबाव वाली अमेरिकी नीतियों की राह में कांटे बिछा चुके हैं।

विंटर ओलिंपिक के इनॉगरेशन से कुछ देर पहले हुई बैठक

चीन विंटर ओलिंपिक का कम्युनिस्ट पार्टी शासन की उपलब्धियों के उत्सव के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्घाटन शुक्रवार रात होना है। यह मुलाकात इसके कुछ घंटे पहले ही हुई है।

 

पुतिन और जिनपिंग दोनों नेताओं की अपने-अपने देश के प्रमुख के तौर पर इसके पहले 37 बार मुलाकात हो चुकी है। दोनों एक-दूसरे को गहरा मित्र मानते हैं।

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