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सनकी तानाशाह का नया फरमान, खाद की कमी हुई तो लोगों से मांगा मानव अपशिष्ट

gsg सनकी तानाशाह का नया फरमान, खाद की कमी हुई तो लोगों से मांगा मानव अपशिष्ट

नॉर्थ कोरिया खाद की कमी से जूझ रहा है। जिसे देखते हुए तानाशाह किम जोंग उन ने लोगों के लिए नया तुगलकी फरमान जारी किया है।

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भुखमरी के कगार पर नॉर्थ कोरिया

आदेश में कहा गया है कि देश का प्रत्येक सक्षम नागरिक खाद के लिए 200 किलोग्राम मानव अपशिष्ट का योगदान दें। उम्मीद है कि इससे बंपर फसल होगी और भुखमरी मिट सकेगी। ऐसा न करने पर 82 रु./किलो के हिसाब से जुर्माना लगाने की भी बात कही गई है।

पिछले साल के मुकाबले दोगुनी हुई डिमांड

बीते साल यहां की सरकार ने प्रत्येक नागरिक से जनवरी महीने की पहली छमाही में 100 किलो मानव मल उपलब्ध कराने को कहा था। इसे इस साल दोगुना कर दिया गया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी कंपनियों से भी कहा गया है कि वह 500 किलो मानव अपशिष्ट का योगदान दें। यह जानकारी उन सिटीजंस रिपोर्ट्स के जरिए सामने आई है, जो उत्तर काेरिया और चीन की सीमा पर मोबाइल फाेन के जरिए एक-दूसरे से खबरों का आदान-प्रदान करते हैं।

बड़ी आबादी भुखमरी का शिकार

नॉर्थ कोरिया में सरकार खेतों में खाद के लिए मानव अपशिष्ट का इस्तेमाल बढ़ाने जा रही है। कोरिया की इस कवायद के पीछे बड़ा कारण चीन है। दरअसल, नॉर्थ कोरिया केमिकल फर्टिलाइजर्स और यूरिया के लिए चीन पर निर्भर है। उसके पास खेती के लिए जरूरी मशीनरी और इक्विपमेंट भी नहीं है। कोरोना की वजह से पिछले दो साल से बॉर्डर भी सील है। इस कारण यूरिया इंपोर्ट नहीं किया जा सका है। बाकी कसर पिछले कुछ सालों में आए बेमौसम बाढ़ और तूफान ने पूरी कर दी। इसके चलते अनाज का उत्पादन गिरता गया। इन वजहों से नॉर्थ कोरिया की 2.58 करोड़ आबादी के बड़े हिस्से में भुखमरी की नौबत आ गई।

फैसले से बढ़ेगी परेशानियां

तय 200 किलो अपशिष्ट देने में नाकाम रहने पर जुर्माना लगाने की भी बात कही गई है। इस फैसले से लोगों की परेशानियां बढ़ सकती हैं, क्योंकि 2019 के आंकड़ो के मुताबिक, देश में प्रति व्यक्ति सालाना औसत आय 95 हजार रुपए है। बता दें कि बीते साल कोरिया में भुखमरी की रिपोर्ट्स आई थी। इसके बाद शासक किम जोंग ने लोग को कम खाना खाने का आदेश दिया था। यहां बीते साल 40 लाख टन से भी कम अनाज हुआ था।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस देश को पेट भरने के लिए 52 लाख टन अनाज की जरूरत है। यानी मांग से 21% कम अनाज पैदा हो रहा है।

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