January 29, 2022 3:38 pm
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 PAKISTAN के मरी हादसे का असल सच, टूरिस्ट स्पॉट पर पहुंचीं डेढ़ लाख कारें, बर्फ हटाने की सिर्फ एक मशीन

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पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से महज 33 किलोमीटर दूर मरी हिल स्टेशन में शुक्रवार और शनिवार को भारी बर्फबारी हुई।

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यहां पर्यटकों की करीब डेढ़ लाख गाड़ियां मौजूद थीं। जाम या बर्फबारी से निपटने का कोई प्लान नहीं था। रविवार तक 26 लोगों के मारे जाने की खबर है।

अब तक रास्ता पूरी तरह साफ नहीं

घटना को कई घंटे गुजर चुके हैं, लेकिन अब तक रास्ता पूरी तरह साफ नहीं किया जा सका है। रेस्क्यू के लिए आर्मी को लगाया गया है। हादसे की वजहों पर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खकान अब्बासी ने अपने विचार रखे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स से मिलान करें तो अब्बासी की जानकारी बहुत हद तक सही साबित होती है।

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ये सिर्फ सरकार की लापरवाही !

अब्बासी ने हादसे पर इमरान खान सरकार को घेरा है। उन्होंने कुछ फैक्ट्स पेश किए और मीडिया रिपोर्ट्स पर गौर करें तो अब्बासी की दलीलें सही नजर आती हैं। अब्बासी ने कहा- मरी को आप अंग्रेजों की जमाने का हिल स्टेशन कह सकते हैं। यहां हर साल बर्फबारी होती है और हर साल लाखों टूरिस्ट्स यहां आते हैं। 1997 में शहबाज शरीफ पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री थे।

उन्होंने नवाज शरीफ के कहने पर यहां के लिए एक प्लान बनाया था। इस पर सभी सरकारों ने अमल किया, लेकिन इमरान खान सरकार और यहां के वर्तमान मुख्यमंत्री उस्मान बजदार ने इस प्लान को कचरे के ढेर में फेंक दिया।

हर साल गाड़ियों की होती है भरमार

अब्बासी ने कहा- यह पहली बार नहीं है कि मरी में डेढ़ लाख गाड़ियां पहुंची हों। 2015 के बाद से अब तक हर साल करीब-करीब इतनी ही गाड़ियां यहां पहुंचती हैं।  लेकिन पहले कभी कोई हादसा नहीं हुआ। इसकी वजह यह है कि लोकल एडमिनिस्ट्रेशन अलर्ट रहता था। इसके लिए पंजाब प्रांत की सरकार के पास एक अलग डिपार्टमेंट भी है। 30 स्नो ब्लोइंग या स्नो रिमूवल मशीन और 6 क्रेन्स रहती हैं।

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सरकार क्या कर रही थी ?

सवाल यह है कि शुक्रवार को ही जब अफरातफरी मचने लगी थी तो डिपार्टमेंट और सरकार क्या कर रही थी। जैसे ही 2 इंच बर्फबारी होती है तो क्रेन और स्नो रिमूवल मशीन काम करने लगती हैं। सड़कों पर नमक छिड़का जाता है। इस बार कोई तैयारी नहीं थी।

कार के हीटर ही बने जानलेवा

अब्बासी ने कहा- जब बर्फीला तूफान आया तो उस वक्त लोगों ने कार के शीशे बंद कर लिए और हीटर ऑन कर लिए। इससे कार में कार्बन मोनोऑक्साइड पैदा हुई और उनका दम घुटने लगा। बाहर निकलने पर सर्दी जान ले लेती। कुछ लोगों ने गाड़ियों से निकलकर सुरक्षित स्थानों पर जाने की कोशिश की, लेकिन वे भी जान बचाने में नाकाम रहे। एक स्नो ब्लोइंग मशीन थी, लेकिन इसके ड्राइवर ने कहा कि गाड़ी में डीजल ही नहीं है। पहले बुजुर्गों ने दम तोड़ा और कुछ देर बाद बच्चों ने। इन्हें बचाने के कोई इंतजाम नहीं थे। इस्लामाबाद यूनिवर्सिटी में कैमिस्ट्री के प्रोफेसर अशरफ हैदर ने अब्बासी के आरोपों को सही बताया है।

इमरजेंसी सर्विस नंबर बंद हो गया

पाकिस्तान में इमरजेंसी सर्विस के लिए टोल फ्री नंबर 1122 है। ‘जियो न्यूज’ से बातचीत में एक टूरिस्ट ने कहा- हमने कई बार इस नंबर पर फोन किया। लेकिन इसे बंद कर दिया गया था। मेरी फैमिली 32 घंटे कार में फंसी रही। बच्चे भूख से तड़पते रह गए। फ्यूल खत्म हो गया। सामने की एक गाड़ी में दो लोगों ने दम तोड़ दिया। पास में होटल था। वहां बिना लाइट और पानी वाले रूम के लिए 25 हजार रुपए मांगे जा रहे थे।

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इस दर्दनाक हादसे में कुछ लोग तो भूख से भी मर गए। फौज भी 24 घंटे बाद पहुंची । गौर करने वाली बात ये है कि उसके पास भी बिस्किट और पानी के अलावा कुछ नहीं था।

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