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तालिबान सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहें हैं 70 देशों के राजदूत, जानें क्या हो सकता है अगला कदम

taliban तालिबान सरकार के खिलाफ एकजुट हो रहें हैं 70 देशों के राजदूत, जानें क्या हो सकता है अगला कदम

तालिबान को कई देशों की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। कई राजनीतिक दल तालिबान की निंदा करते दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक इस मनमानी तालिबानी सरकार के खिलाफ अफगानिस्तान के कई बड़े चेहरे एक साथ नजर आ रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई, पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह, डॉक्टर अब्दुल्लाह अब्दुल्लाह और रेसिस्टेंट फ्रंट के नेता अहमद मसूद के भी विपक्ष के इस गठबंधन में शामिल होने की बात कही जा रही है।

70 देशों में तैनात सभी राजदूत भी हो सकते हैं शामिल

आपको बता दें कि एक मज़बूत राजनीतिक गठबंधन के लिए ये कई नेता एक साथ आने को तैयार हैं।  70 देशों में तैनात सभी राजदूत भी इस राजनीतिक विपक्ष के समर्थन में नजर आ सकते हैं।

सूत्रों  के मुताबिक तालिबान के खिलाफ यह तमाम नेता एक निर्वासित सरकार की संभावनाओं पर भी विचार कर सकते हैं।  जिसके लिए ये बड़े राजनीतिक चेहरे कई देशों के साथ  बातचीत कर सकते हैं।

बता दे कि नई तालिबानी सरकार ने कई दावे किये हों लेकिन उनका रुख़ बदला नहीं है। तालिबानी नेता मोहम्मद मोबीन ने हाल ही में  दिये एक इंटरव्यू में कहा था कि अफगानिस्तान ने किसी भी देश को समावेशी सरकार की मांग करने का अधिकार नहीं दिया है।  साथ ही उन्होंने कहा कि क्या यह पड़ोसी देशों के प्रतिनिधियों और  जासूसों को सरकार में शामिल करने जैसा नहीं है?

भारत  मान्यता देने की जल्दबाजी में नहीं

बता दें कि एससीओ  सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि अफगानिस्तान में नई सरकार समावेशी नहीं है और बिना नेगोशिएशन के बनाई गई है।  ऐसे में मान्यता देने की जल्दबाजी करना ठीक नहीं है।

सभी देशों को एक सामूहिक रूप से फैसला लेना चाहिए, जैसा कि हम सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री मोदी अमेरिकी दौरे पर हैं। इस बीच वो राष्ट्रपति जो बाइडेन से मुलाकात करेंगे। कहा जा रहा है कि इस बीच अफगानिस्तान को लेकर भी बातचीत की जा सकती है।

 

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