भारतीय क्रिकेट टीम को मिला सचिन तेंदुलकर का वारिस

भारतीय क्रिकेट टीम को मिला सचिन तेंदुलकर का वारिस

राजकोट के स्टेडियम में भारी संख्या में मौजूद दर्शकों के सामने वेस्टइंडीज की टीम के खिलाफ पहली बार टेस्ट क्रिकेट में इंडिया का प्रतिनिधित्व करने उतरा 18 साल के एक लड़के ने पहली गेंद खुद खेलने का दम दिखाया। और बेहतरीन शॉट लगाकर शतक भी ठोंके।इस खिलाड़ी के प्रदर्शन को देखकर ऐसा लगता है कि भारतीय क्रिकेट को सचिन तेंदुलकर का वारिस मिल गया है।

 

भारतीय क्रिकेट टीम को मिला सचिन तेंदुलकर का वारिस
भारतीय क्रिकेट टीम को मिला सचिन तेंदुलकर का वारिस

इसे भी पढे़ःपाकिस्तान में खेलने के लिए वेस्टइंडीज की टीम को दिया जा रहा लालच

मालूम हो कि पृथ्वी शॉ का नाम पिछले लगभग 8 साल से क्रिकेट के में सुना जा रहा है। गौरतलब है कि शॉ ने तीन वर्ष की उम्र में बल्ला अपने हाथों में थाम लिया था।तब उनका कद स्टंप के बराब भी नहीं था।जब वह बल्लेबाजी किया करता था। लेकिन आज उनके कद की तुलना दुनिया के बेहतरीन क्रिकेटरों से की जाती है।

पृथ्वी को करीब दस साल पहले सचिन तेंदुलकर ने बल्लेबाजी करते हुए देखा और आठ साल के बच्चे का, गेंद को समझने और सही तकनीक के साथ पूरी ताकत से शॉट लगाने का अंदाज बेहदपसंद आया था। उसी दौरान सचिन ने उनके भारत के लिए खेलने की भविष्यवाणी की थी।

इसे भी पढ़ेःबांग्लादेश ने वेस्टइंडीज को 19 रनों से हराया, आंद्रे रसेल ने खेली धमाकेदार पारी

पृथ्वी के बेहतरीन प्रदर्शन का चमत्कार ही है,वह रिजवी स्प्रिंगफील्ड के लिए खेलता है।बता दें कि रिजवी स्प्रिंगफील्ड मुंबई की सर्वश्रेष्ठ स्कूल टीम है।वह शहर के प्रसिद्ध एमआईजी क्रिकेट क्लब में क्रिकेट की अति सूक्ष्म अंतर को देखता और समझता है।क्लब की प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि सचिन के बेटे अर्जुन को भी इसी क्लब में कोचिंग कराई जा रही है।

पृथ्वी शॉ जानते हैं कि उनके खेल में कुछ ऐसी बात है कि लोग उनकी तुलना सचिन तेंदुलकर से करते हैं।हाल ही में शॉ ने एक इंटरव्यू में कहा कि लोग मुझे कहते हैं कि मुझमें सचिन तेंदुलकर का अक्स नजर आता है।उन्होंने कहा कि वह क्रिकेट के भगवान से मेरी तुलना करते हैं।शॉ ने कहा कि मेरे लिए यही ठीक है कि मैं इन बातों पर ध्यान दिये बिना बल्लेबाजी पर ध्यान दूं।

शॉ का परिवार मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला है

बता दें कि पृथ्वी शॉ का परिवार मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला है। पिता पंकज शॉ बहुत पहले मुंबई के पास विरार में आकर रहने लगे थे। और छोटे से पृथ्वी की क्रिकेट में दिलचस्पी देखकर महज तीन साल की उम्र में विरार की क्रिकेट अकादमी में उनका दाखिला करा दिया। पृथ्वी शॉ बहुत छुटपन में अपने दोस्तों और पिता के साथ जेडब्ल्यू मैरिएट के नजदीक बीच पर क्रिकेट खेला करते थे।

बाद में पृथ्वी को एक कंपनी के रूप में प्रायोजक( स्पॉन्सर) मिला तो परिवार मुंबई चला गया। महज चार साल की उम्र में अपनी मां को खो देने वाले पृथ्वी के जीवन पर उनके पिता का बहुत गहरा असर है। उन्हें एक अच्छा इनसान बनाने के साथ ही एक बेहतरीन क्रिकेट खिलाड़ी बनाने का सपना देखने वाले अपने पिता को पृथ्वी ने चार अक्टूबर को एक बेहतरीन तोहफा दिया। जब उन्होंने अपने पहले ही मैच में सतक लगाकर खुद को सचिन तेंदुलकर की कतार में स्थापित कर दिया।

शॉ सचिन के बाद टेस्ट क्रिकेट में सतक बनाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। इसी साल जून में फादर्स डे पर पृथ्वी ने सोशल मीडिया पर अपने पिता को उनपर भरोसा करने के लिए धन्यवाद दिया। यदि शॉ इसी तचरह प्रदर्शन करते रहे तो विश्व स्तर में सर्व श्रेष्ट क्रिकेटरों की श्रेणी में गिने जाएंगे। और पूरा देश उनका धन्यवाद करेगा।
महेश कुमार यादव

महेश कुमार यादव