उत्तराखंड में गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चारों धामों में सबसे प्रमुख बद्रीनाथ के कपाट खुले

देहरादून। उत्तराखंड में गढ़वाल के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चारों धामों में सबसे प्रमुख बद्रीनाथ के कपाट सोमवार को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। सुबह करीब साढ़े चार बजे पट खुलने के साथ ही भक्तों ने अपने भगवान के दर्शन का सिलसिला शुरू कर दिया। जयकारों के साथ भक्त अपनी आवाज बद्रीविशाल तक पहुंचाने की कोशिश में लग गए। पिछले दो दिनों में हजारों भक्त बाबा बद्रीनाथ के दर्शन के लिए पहुंच चुके हैं। जैसे ही पट खुले बाबा बद्रीनाथ का आशीर्वाद लेने के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। चारों तरफ बर्फ की सफेद पहाड़ियों के बीच बना बद्रीनाथ का मंदिर एक अलग ही छटा बिखेरता है। जिसमें फूलों की सजावट ने चार चांद लगा दिए।

बता दें कि सैकड़ों-हजारों किलोमीटर का सफर तय करके पहुंचे भक्तों में जबरदस्त उत्साह है। सोमवार सुबह साढ़े चार बजे बद्रीनाथ के पट खोले गए। हालांकि आज भगवान बद्रीनाथ जी के निर्वाण दर्शन कर रहे हैं। काली शिला पर भगवान के दर्शन बिना श्रृंगार के किए जाते हैं, इस लिए इसे निर्वाण दर्शन कहा जाता है। सोमवार बद्रीनाथ मंदिर में विशेष पूजा अर्चना नहीं होती। सोमवार को शाम की आरती के बाद कल यानी मंगलवार से रोज विशेष पूजा अर्चना शुरू होगी।

वहीं बद्रीनाथ सहित गढ़वाल के हिमालयी क्षेत्र में स्थित चारों धामों के कपाट सर्दियों में भारी हिमपात और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण हर साल अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं। जो अगले साल अप्रैल-मई में दोबारा खोल दिए जाते हैं। गढ़वाल हिमालय की आर्थिक रीढ़ मानी जाने वाली चारधाम यात्रा छह माह के सीजन के दौरान देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस साल चार धामों के लिए यात्रा की शुरुआत 18 अप्रैल से गंगोत्री और यमुनोत्री के पट खुलने के साथ ही हो गई है।

गौरतलब है कि केदारनाथ धाम के कपाट बीते रविवार की सुबह श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए थे। पुजारियों के मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं के जयकारे के बीच छह महीने बाद केदारनाथ के कपाट खोले गए। कपाट खुलने के बाद मंदिर में पूजा अर्चना की गई, उसके बाद भगवान शिव के दर्शन शुरू हो गए।