मुंह में जीरो टॉरलेंस बगल में घोटाला क्या यही है बीजेपी का चेहरा, आरोपियों को बनाया है पदाधिकारी

नोएडा। उत्तर प्रदेश में राशन घोटाला का खुलासा हुआ है।जिसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय हरकत में आया और जांच के बाद रिपोर्ट भी दर्ज कर ली गई है।लेकिन इस सब के बाद भी बड़ा सवाल है कि क्या यह जांच मुकाम तक पहुंच पाएगी? क्योंकि इसके आरोपियों को सरकार का संरक्षण मिला है।  आपको बता दें कि घुटाले के आरोपियों में चार बीजेपी नेताओं के नाम समेत कई दिग्गजों के नाम शामिल हैं। गौरतलब है कि नोएड़ा दर्ज रिपोर्ट में 3 नम्बर में सुशील कुमार शर्मा का नाम है।

 

उत्तर प्रदेशःराशन घोटाले में 4 बीजेपी नेताओं समेत कई दिग्गज शामिल
उत्तर प्रदेशः नोएडा की सरकारी राशन  की दुकान के राशन घोटाले में 4 बीजेपी नेताओं समेत कई दिग्गज शामिल

 

शर्मा बीजेपी के जिला महांमंत्री है।वहीं 12वें नंबर में जीत सिंह और 16वें नंबर पर विनोद त्यागी का नाम है जो बीजेपी से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मंत्री हैं।एफआईआर में 17 नंबर पर अरविन्द गुप्ता का नाम है। आपको बता दें कि उक्त के संबंध में जिला आपूर्ति अधिकारी ने थाना सेक्टर-20 नोएडा गौतमबुद्धनगर में एफ आईआर दर्ज कराई गई है।थानाध्यक्ष को प्राथमिकी में कहा गया है कि आयुक्त खाद्द एवं रसद विभाग उ.प्र.जवाहर भवन लखनऊ के पत्रांक 5376/ आधार प्रमाणीकरण/2016 दिनांक 21 अगस्त 2018 का अवलोकन करें।

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जिसके अन्तर्गत उल्लेख किया गया है कि कि सहरी क्षेत्र में एफ.पी.एस आटोमेशन व्यवस्था के अन्तर्गत उचित दर दुकान पर ई- पास मशीनों से राशन कार्ड लाभार्थियों के किए जाने वाले आधार आधारित आवश्यक वस्तु विवरण हेतु एन.आई.सी.उत्तर प्रदेश के माध्यम से यू.आई.डी.ए.आई की आधार बायोमेट्रिक आथेन्टिकेशन तकनीकी का प्रयोग किया  जाता है।

जानकारी दिए जाने पर जुलाई के डाटा का एन.आई.सी, उ.प्र.दवारा विस्तार से परीक्षण कराया था

कतिपय जिला पूर्ति अधिकारियों द्वारा उक्त कम्प्यूटराइज्ड तकनीकी का दुरुपयोग होने की जानकारी दिए जाने पर जुलाई के डाटा का एन.आई.सी, उ.प्र.दवारा विस्तार से निरीक्षण कराया था। जिसमें पाया गया था कि कुछ प्रकरणों में वास्तविक लाभार्थाी के डाटा बेस से सीडेड उसके आधार संख्या को एडिट करके किसी अन्य व्यक्ति की आधार संख्या को सीड कर दिया गया। और उस व्यक्ति के बायोमेट्रिक का प्रयोग करके ट्रांजेक्शन प्रक्रिया पूर्ण की गई।

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राशन निकाला गया।उक्त ट्राजेक्शन के उपरांत वास्तविक लाभार्थी की आधार संख्या को दुबारा उसके डेटाबेस में अपडेट कर दिया गया।अन्ततां इस तरह की फर्जी प्रक्रिया से वास्तविक लाभार्थी को जरूरी वस्तु मिलने के अधिकार से वंचित कर दिया।कुछ जनपदों में मामले हजारों की संख्या देखने को मिले हैं। आपको बता दें कि इस तरह से यू.आई.डी.ए.आई प्रदान की जाने वाली आधार आथेन्टीकेशन सुविधा का सुनियोजित तरीके से दुरुपयोग करने वाला अपराधी की श्रेणी में आता है। आपको बता दें इस तरह की जालसाजी उप्र के 43 जिलों में देखने को मिली है।

गौरतलब है कि जब रक्षक ही बक्षक बन जाए तो फिर बचेगा ही क्या ?एेसा ही सत्ता धारी बीजेपी के नेताओं ने उत्तर प्रदेश के गरीबी की मार झेल रहे कई लोगों का राशन निगल गए है। और गरीबों के नाम पर सरकार के कागजी रिकॉर्ड  का खाका लगातार जस का तस लिका जा रहा है।

अजस्र पीयूष