क्यो लगाते हैं लोग माथे पर चंदन-ये है कारण

नई दिल्ली। पूजा के दौरान आपने माथे पर चंदन लगाने के बारें में जरुर सुना होगा और टीके के रुप में चंदन का प्रयोग काफी खास माना जाता है। चन्दन एक खास तरह की सुगन्धित लकड़ी है। इसकी सुगंध बेमिसाल होती है। जैसे-जैसे इसका पौधा बढ़ता है, वैसे ही इसके तने और जड़ों में सुगन्धित तेल का अंश भी बढ़ने लगता है।

इसकी लकड़ी का उपयोग मूर्तिकला, साज-सज्जा के सामान, सुगन्धित पदार्थ आदि बनाने में होता है। मुख्यतः चन्दन दो प्रकार का होता है- लाल और सफेद, दोनों का ही खूब प्रयोग किया जाता है। पर माथे पर चंदन लगाने के पीछे धार्मिक और वैज्ञानिक दोनों कारण है।

चन्दन का धार्मिक महत्व क्या है?

हिन्दू धर्म में चन्दन को अत्यंत पवित्र माना जाता है।

पूजा के हर कार्य में चन्दन की लकड़ी, चन्दन का लेप और चन्दन के इत्र का प्रयोग किया जाता है।

शिवलिंग का अभिषेक भी चन्दन से करने की परंपरा पाई जाती है। श्री हरि और उनके अवतारों के लिए सफेद चन्दन का लेपन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

देवी की उपासना में लाल चन्दन ज्यादा प्रयोग होता है।

बौद्ध धर्म में चन्दन के प्रयोग से ध्यान करने की परंपरा बताई गई है। ज्योतिष में ग्रहों की समस्या के समाधान के लिए भी चन्दन का प्रयोग किया जाता है।

चन्दन का आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक प्रयोग

चन्दन से आयुर्वेद में तमाम तरह की औषधियां बनाई जाती हैं।

चन्दन के चूर्ण को कुछ विशेष तरह के पदार्थों में मिलाकर आयुवृद्धि की औषधियां बनाई जाती हैं।

ह्रदय रोग, त्वचा के रोग और मानसिक रोगों में चन्दन के तेलों का खूब प्रयोग होता है।

सुगंध चिकित्सा और पंचकर्म में भी चन्दन का प्रयोग किया जाता है।

कैसे लगाए चंदन का तिलक

जब भी आप चंदन का तिलक माथे पर लगाए तो आप पहले चन्दन की लकड़ी को पत्थर पर घिस लें।

फिर उसके बाद आप पहले अपने इष्ट को अनामिका अंगुली से तिलक लगाएं।

फिर स्वयं को मस्तक, कंठ और नाभि पर तिलक करें। देवी की उपासना में लाल और अन्य में सफेद चन्दन का प्रयोग करें।

कब करें चंदन का प्रयोग

चन्दन का एक छोटा सा टुकड़ा ले लें।

इसे नीले कपडे में रखकर लाकेट की तरह बना लें।

शनिवार की शाम को इसे लाल धागे में गले में धारण करें।