obesity in kids 1 अगर आप करते हैं बच्चों की पिटाई, तो उन पर पड़ सकता है नकारात्मक असर

बच्चों को भगवान का रूप माना जाता है। कहा जाता है कि छोटे बच्चे जब भी कोई बात कहते हैं तो वह सच ही होती है। उनकी मासूमियत ही सबका मन मोह लेती है। लेकिन जब वह शैतानी करते हैं तो अपने माता पिता और परिजनों की नाक में दम कर रखतें है। अकसर देखा गया है कि बच्चे की गलती और शैतानी के चलते गुस्सा आने पर कुछ पैरेंट्स उन पर हाथ उठा देते हैं। जिसके कारण कई बार इस पिटाई का बच्चों के मानसिक और स्वास्थ पर गहरा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

पिटाई करने से पड़ता है नकारात्मक असर

अकसर बच्चे शैतानी के साथ गलत हरकत करते हैं जो उन्हें नहीं करनी चाहिए। जिसके बाद पैरेंट्स बच्चों को समझाने की बजाए उनकी पिटाई करना शुरू कर देतें हैं। माता पिता का यह मानना है कि मारने के बाद बच्चे सुधर जाएंगे। हालांकि इसका उल्टा असर देखने को मिलता है। जिसके कारण बच्चों के मानसिक स्वास्थ पर गहरा और नकारात्मक असर पड़ता है। जो बिल्कुल भी सहीं नही है।

खत्म हो जाता है बच्चों का डर

गलती करने पर अगर बच्चों की पिटाई बार बार की जाए तो उनके अंदर से डर खत्म हो जाता है। जिसके बाद बच्चा बार -बार वही गलती दोहराता है] और सुधरने की बजाए लगातार बिगड़ने लग जाता है। इसलिए जहां तक हो सके बच्चों को समझाने का ही प्रयास करें।

बच्चों के मन में पैदा होती है घृणा

अगर बच्चों को छोटी -छोटी बातों पर लगातार पीटा जाए तो वह यह सोचने लग पड़ते है कि उनके पेरेंट्स उनसे प्यार नहीं करते। उनको हमारी जरूरत नहीं है। जिसके बाद बच्चे वो अपनी गलती को सही करने की बजाय उस गलती को दोहराने लगते है।

मन में भर जाता है गुस्सा

मारपीट से बच्चे डर के मारे सहम जाते हैं । लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाते। जिस कारण उनके मन में अपने माता पिता के लिए गुस्सा भर जाता है,, और वह अंदर ही अंदर अपने गुस्से को दबाए रखते हैं।  जब ऐसी स्थिति बन जाती है तो वह किसी के लिए भी सही नहीं होती।

टूट जाता है आत्मविश्वास

बच्चों की अकसर पिटाई से उनके अंदर का आत्मविश्वास टूट जाता है और उसमें कमी आने लग पड़ती है। धीरे – धीरे उनको यह लगने लगता है वह किसी भी काम के लायक नहीं हैं। वह कोई भी काम सही से नहीं कर सकता। जब बच्चे के मन में यह भावना पैदा हो जाती है तो उसके भविष्य पर बहुत गलत प्रभाव पड़ता है।

छोटी उम्र में हो जाते हैं डिप्रेशन का शिकार

जो बच्चे अधिकतर हिंसा का शिकार होते हैं या उनको लगातार परेशान किया जा रहा हो तो इसका असर उनके दिमाग पर पड़ता है। उनके सोचने की शक्ति ना के बराबर हो जाती है। जिसके बाद भविष्य में वह ना तो अपना निर्णय ले सकतें है और ना सिचुएशन को हेंडल कर सकते हैं । जिससे उनका काफी नुकसान होता है।

इसलिए जहां तक हो सके बच्चों को मारने की बजाए उन्हें समझने और समझाने की कोशिश की जानी चाहिए । ताकि वह अपनी जिंदगी खुल के जी सकें

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