pummy बुरे दौर से गुजर रहा होटल व्यवसाय, 25 फीसदी का नुकसान झेल रहे कारोबारी

लखनऊ। कोरोना काल में सेहत के साथ जेब पर भी वायरस का हमला हुआ है,बहुत से व्यापार खस्ता हाल हैं,मंदी जैसे हालात हैं,धीरे-धीरे कारोबारी अपने व्यवसाय को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं,लेकिन कोरोना के एक और लहर का खतरा उनकी उम्मीदों पर पानी फेर सकता है,इसके पीछे का सबसे बड़ा काराण कोरोना की पहली व दूसरी लहर में कारोबार का मंद पड़ जाना रहा है या यूं कहें कि बंद हो जाना रहा है, तो गलत न होगा।

होटल इंडस्ट्री के हाल तो इतने खराब है कि इस व्यवसाय से जुड़े कारोबारी मौजूदा दौर में दस से पन्द्रह प्रतिशत कारोबार कर पा रहे हैं। इन्हीं सब मुद्दों पर भारत खबर संवाददाता वीरेंद्र पाण्डेय ने यूपी होटल बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट राकेश छावड़ा ‘पम्मी’ से बात की और यह जानने की कोशिश की किस हालत में है होटल कारोबार।

यूपी होटल बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट राकेश छावड़ा ‘पम्मी’ राजधानी के जाने माने होटल कारोबारी है,होटल सियोना रेजीडेंसी लखनऊ के बड़े होटलों में शुमार है।

यूपी होटल बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट राकेश छावड़ा ‘पम्मी’ के मुताबिक कोरोना काल में बड़े होटलों को भारी नुकसान हुआ है। इस दौरान वही होटल थोड़ा बहुत कारोबार कर सके हैं,जिनके यहां शादी,ब्याह के आयोजन हो रहा है।

वह बताते हैं कि मौजूदा समय में होटल इंडस्ट्री का दस से पन्द्रह प्रतिशत ही काम चल रहा है, खर्चे हमारे पहले जैसे ही हैं। उन्होंने बताया कि खर्चे में हम कटौती कर नहीं सकते,बस स्टाफ की संख्या पहले के मुकाबले कम की है,लेकिन जिस स्टाफ को छुट्टी दी है,उनके रहने व खाने का खर्च तो वहन करना ही पड़ रहा है,बात करें बिजली के बिल की तो उसमें कोई छूट मिली नहीं।

25 फीसदी की आई गिरावट

उन्होंने कहा कि पिछले लॉकडाउन से अब तक 40 प्रतिशत का कारोबार होटल इंडस्ट्री ने किया है। यदि यह कारोबार 50 से 60 फीसदी तक हो जाता तो हम बराबर पर छुट जाते,यानी की जो खर्च आ रहा था,उतना निकल जाता।

सरकार से बार लाइसेंस फीस माफ करने की उठ रही मांग

यूपी होटल बार एसोसिएशन के वाइस प्रेसिडेंट राकेश छावड़ा ‘पम्मी’ ने सरकार से बार लाइसेंस फीस माफ करने की अपील की है। इसके पीछे की वजह वह बताते हैं कि पिछले साल बार लाइसेंस रिनीवल के लिए फरवरी महीने में फीस जमा की गयी,जिसके बाद कोरोना ने दस्तक दे दी और बार को लगभग 6 महीने के लिए बंद करना पड़ा। इस बार भी ऐसा ही हुआ जैसे ही फरवरी में फीस जमा की अप्रैल में कोरोना की भयावह स्थित को देखते हुये बार करीब दो महीने बंद रहे, जिससे भारी नुकसान उठाना पड़ा।

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