विधवाओं के जीवन में उर्जा का नया संचार करती है बृज की होली

मथुरा। बृज की होली सबसे निराली है यहाँ हर बार अलग अंदाज में होली का आयोजन किया जाता है यहां आश्रय सदनों में रहने वाली विधवा महिलाएं प्रिय कन्हाई के साथ होली खेलती हैं जिससे उनके जीवन में इस नई परंपरा के माध्यम से उर्जा भरने का काम किया जाता है।

श्रीधाम वृंदावन में वर्तमान में करीब 2000 विधवा महिला हैं। इनके जीवन दुख का सागर बन गया है। ऐसे में इन्हें कुछ नई अनुभूति कराने के लिए सुलभ इंटरनेशनल ने नई पहल को कदम बढ़ाया है। संगठन की ओर से गोपनाथ मंदिर में फूलों की होली का आयोजन किया गया। इसमें परंपरागत रूप से पहले रासलीला समारोह हुआ जिसमें सभी विधवाओं ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया वहीं उन्होंने होली के दौरान कान्हा पर रंग-बिरंगे फूल बरसाकर उन्हें होली रस से सराबोर कर दिया।

सुलभ इंटरनेशनल संस्था के अनुसार विधवाओं के जीवन में होने जा रहे इस बदलाव से वह बेहद खुश हैं। आखिर सदियों पुरानी प्रथा को दरकिनार कर वह इस बार होली खेली विधवाओं ने होली खेलने की अपनी इच्छा जब इनकी देखभाल कर रही संस्था सुलभ इंटरनेशनल के सामने जाहिर की तो संस्था के संस्थापक डॉ.बिंदेश्वरी पाठक ने सहमति जता दी। परंपरागत रासलीला कार्यक्रम के लिए संस्था की ओर से व्यापक तैयारी की गयी बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सुलभ इंटरनेशनल नामक संस्था आश्रय सदनों की विधवा-वृद्धाओं को बेहतर जिंदगी व्यतीत करने के लिए सुविधाएं प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रही है।

ये विधवाएं मंदिरों में जाकर भीख न मांगें, इसके लिए कई प्रयास किये जा रहे है इसी के तहत इस होली का आयोजन किया गया कई वर्षों से अपनों का तिरस्कार और समाज की बेरुखी झेल रही इन महिलाओं में इस बार की भले ही इनके जख्म न भर पाए लेकिन इतना जरूर है की इनके जीवन में नयी उर्जा जरूर भर देगी।

 -योगेश भरद्वाज