September 28, 2022 8:17 pm
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सदन में सतत् विकास लक्ष्यों पर हुई ऐतिहासिक और गम्भीर चर्चा- स्पीकर

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28 अगस्त को उत्तराखंड के चतुर्थ विधानसभा के द्वितीय सत्र में एक और विशिष्ट उपलब्धि  सदन के साथ जुड गयी। सदन में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा निर्धारित विकास के 16  सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स यानी सतत् विकास लक्ष्यों पर ऐतिहासिक चर्चा हुई। उत्तराखंड विधानसभा उत्तर-प्रदेश के बाद दूसरी ऐसी विधानसभा होगी, जिसने संपूर्ण उपवेशन इस महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा के लिए समर्पित किया।इस दौरान विधानसभा के 29 सदस्यों ने अपने विचारों को रखा।सदन शनिवार को बिना बाधित हुए 6 घंटे 56 मिनट चला साथ ही  विधानसभा अध्यक्ष द्वारा सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।

सत्र के दौरान सदन में मुख्यमंत्री, संसदीय कार्य मंत्री सहित करण माहरा, देशराज कर्णवाल, प्रीतम पंवार, खजान दास, राम सिंह केड़ा, ममता राकेश, मुन्ना चौहान, काजी निजामुद्दीन सहित अनेकों विधायकों द्वारा विधानसभा के सफल और सुचारु संचालन के लिए विधानसभा अध्यक्ष की सराहना की गयी साथ ही सतत् विकास लक्ष्य पर एक दिन का पूरा उपवेशन आयोजित करने के लिए बधाई भी दी। विधानसभा अध्यक्ष द्वारा अपने अध्यक्ष विवेकाधीन कोष को विधायकों के माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में दिए जाने के लिए विधायकों द्वारा सदन से श्री अग्रवाल की प्रशंसा की गयी।

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इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद  अग्रवाल ने नेता सदन तथा कार्य मंत्रणा समिति का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस विषय पर सत्तापक्ष एवं विपक्ष ने रुचि दिखाई और उपवेशन की अवधि को न सिर्फ एक दिन के लिए बढ़ाया, बल्कि समस्त उपवेशन को इस विषय पर चर्चा के लिए रखा।उन्होंने प्रतिभाग करने वाले सभी माननीय सदस्यों का दलगत राजनीति से ऊपर उठकर प्रदेश के विकास में एकजुट होकर सतत विकास लक्ष्यों पर चर्चा एवं अपने सुझाव रखने के लिए सदन की पीठ से  आभार व्यक्त किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सितंबर, 2000 में यूनाइटेड नेशंस ने मिलेनियम समिट किया था और उसमें 198 देशों ने एकमत होकर 08 मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स यानी सहस्त्राब्दि विकास लक्ष्य तय किए थे। इन लक्ष्यों को 2015 तक पूरा किया जाना था। 2015 में सभी देश लक्ष्यों की समीक्षा करने के लिए एकत्रित हुए। कई उपलब्धियां इस दौरान विभिन्न राष्ट्रों ने हासिल कीं और इसके काफी सकारात्मक परिणाम देखने को मिले, लेकिन यह भी महसूस किया गया कि अभी काफी कुछ और करने की आवश्यकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड सरकार द्वारा दिसंबर 2018 में राज्य विजन दस्तावेज 2030 जारी किया गया था, जो इन लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभा रहा है।

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