hariyali 1 हरियाली तीज पर जानें मां पार्वती और भगवान शिव से जुड़े अनोखे रहस्य..

सावन का पावन महीना चल रहा है। ये महीन भगवान शिव और उनके भक्तों के लिए बेहद खास होता है। यही कारण है कि, शिव भक्ति में लीन शिवभक्त पैदल ही कांवड़ निकालते है। सावन के माह में जो भी भक्त भगवान शिव से मांगता वो पूरा होता है। आज पूरे देश में सावन के माह पड़ने वाली हरियाली तीज का पर्व मनाया जा रहा है।

lord 11 हरियाली तीज पर जानें मां पार्वती और भगवान शिव से जुड़े अनोखे रहस्य..
हरियाली तीज को सौन्दर्य और प्रेम का त्योहार माना जाता है इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना करती है। घर की सुख संमृद्धि के लिए महिलाएं हरियाली तीज का व्रत करती हैं। कहते हैं इस व्रत को करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। भगवान शिव और माता पार्वती के पुनर्मिलन के रुप में हरियाली तीज मनाई जाती है। श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की तृतिया को हरियाली तीज मनाई जाती है इस बार 23 जुलाई यानि की आज को हरियाली तीज मनाई जा रही हैं।पंचांग के अनुसार, इसे सावन महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को धूमधाम के साथ मनाया जाता है।

तीज का त्योहार सुहागिन महिलाओं के लिए बहुत खास होता है। इस दिन सुहागन स्त्रियां व्रत रखती हैं। मां पार्वती और शिव जी की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र और सौभाग्य की प्रार्थना करती हैं। इस दिन महिलाएं बागों में झूला झूलती हैं और अपने हाथों पर मेहंदी भी रचाती हैं।

हरियाली तीज का शुभ मोहुर्त
तृतिया आरंभ- 22 जुलाई शाम 7 बजकर 23 मिनट से
तृतिया समाप्त- 23 जुलाई शाम 5 बजकर 4 मिनट तक

हरियाली तीज की कैसे करें पूजा?
हरियाली तीज पर घर की साफ सफाई करें। चौकी पर मंडप सजाकर मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश की प्रतिमा बनाएं। आप मिट्टी में गंगाजल भी मिला सकते हैं। सभी प्रतिमाओं को चौकी पर स्थापित कर दें। इसके बाद सभी देवताओं का आह्वान करते हुए षोडशोपचार पूजन करें।

हरियाली तीज पर क्या करें महिलाएं?
महिलाएं सोलह श्रृंगार करके निर्जला व्रत रखती हैं और पूरी विधि-विधान से मां पार्वती और भगवान शिव की पूजा करती हैं। हरियाली तीज व्रत का पूरी रात चलता है। इस दिन महिलाएं रात्रि जागरण करते हुए भजन कीर्तन करती हैं। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए इस व्रत को कर सकती हैं।

क्यों मनाया जाता है हरियाली तीज का पर्व?
शिव पुराण में कहा गया है कि माता पार्वती ने भगवान भोलेनाथ को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसके लिए माता पर्वती को 108 जन्म लेने पड़े। शक्ति ने 107 जन्मों तक कठोर तपस्या की जिसके बाद108वें जन्म में माता ने अपने तप से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया। परिणाम स्वरूप महादेव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार कर लिया। इस दिन भगवान भोलेनाथ ने अपने और माता पार्वती के मिलन की कहानी माता पार्वती को सुनाई थी। तभी से महिलाएं प्रेम के इस त्योहार को मनाती है।

भारत के किन हिस्सों में मनाई जाती है हरियाली तीज?
हरियाली तीज पर्व उत्तर भारत के राज्यों का मुख्य त्यौहार है। जिसके चलते इसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार, झारखंड में हर साल हर्षोउल्लास के साथ मनाया जाता है। ये पर्व विदेशों में रह रहे भारतीयों द्वारा भी मनाया जाता है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में इसे कजली तीज के नाम से जाना जाता है। सालभर सावन और भाद्रपद के महीने में, कुल 3 तीज आती हैं, जिनमें पहली हरियाली तीज व छोटी तीज, दूसरी कजरी तीज और फिर अंत में हरतालिका तीज मनाई जाती है।

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तीज महोत्सव की हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है। यही कारण है कि, इस पर्व को बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

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