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हरिद्वार कुंभ को लेकर सरकार का फैसला, जानिए साधु संत क्यों हैं नाराज

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हरिद्वार। हरिद्वार में होने वाले महाकुंभ को लेकर सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। सरकार ने कोरोना महामारी के चलते महाकुंभ का स्वरूप को ही बदल दिया है। आपको बता दें कि इस बार के महाकुंभ का स्वरूप हर बार की तुलना में इस बार बहुत छोटा होगा। सरकार ने महाकुंभ को सिर्फ 48 दिनों तक आयोजित करने को निर्णय लिया है। कुंभ के आयोजन को लेकर अभी सरकार और संतों के बीच आपसी तकरार जारी है।

हरिद्वार महाकुंभ की तैयारियां पिछले 1 साल से चल रही हैं। सरकार महाकुंभ की तैयारियों में हर व्यवस्था बनाने की कोशिश में जुटी है। लेकिन कोरोना ने इस बार महाकुंभ के स्वरूप को ही बदल दिया। इसी वजह से सरकार महाकुंभ को 48 दिनों में ही पूरा कर लेना चाहती है। तो वहीं कुंभ के आयोजन को लेकर अभी सरकार और संतों के बीच आपसी तकरार जारी है। गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ट भी ये बात कह रहे हैं सरकार के नोटिफिकेशन के आधार पर कुम्भ भले ही 48 दिन का हो। लेकिन आस्था के आधार पर मकर संक्रांति, बसंत पंचमी स्नानों से कुंभ मान लिया जाएगा। क्योंकि कुंभ वर्ष होने के नाते लोग मान चुके हैं कि कुम्भ शुरू हो गया। वहीं उन्होंने ये बात भी कही कि कुंभ का स्वरूप छोटा होने से यहां के व्यापारियों पर भी बड़ा असर पड़ेगा।

 

कुंभ के आयोजन को लेकर सरकार और संतों के बीच तकरार जारी है। सरकार 48 दिन में कुंभ कर लेना चाहती है। तो कुछ साधु संत कुंभ को ऐतिहासिक बनाने की कोशिश में जुटे हैं। लेकिन कोरोना और नोटिफिकेशन जारी ना होने से अभी तक हरिद्वार में साधु.संतों का जमावड़ा नहीं लगा है। इससे साफ जाहिर है कि साधु संत और अखाड़े भी नोटिफिकेशन के इंतजार में ही बैठे हैं।

 

वहीं अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्री महेंद्र हरि गिरि महाराज कुंभ का स्वरूप छोटा होने की वजह कोरोना को ही मानते हैं। उनका कहना है कि कुंभ के दौरान कोरोना की वजह से एक भी व्यक्ति की जान गई तो पूरी सरकार और कुम्भ मेला बदनाम हो जाएगा।

 

 

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