September 20, 2021 1:04 am
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बुंदेलखंडः महिलाओं के दंगल में पुरुषों की नो एंट्री, अंग्रेजों के जमाने में शुरू हुई ये परंपरा

बुंदेलखंडः महिलाओं के दंगल में पुरुषों की नो एंट्री, अंग्रेजों के जमाने में शुरू हुई ये परंपरा

हमीरपुरः बुंदेलखंड यूपी का एक ऐसा अनोखा क्षेत्र हैं, जो कई मायनों पर महत्वपूर्ण हैं। इस क्षेत्र में एक गांव ऐसा है जहां महिलाओं के एक अनोखे दंगल को देखने का मौका मिलता है। इस दंगल में पुरुषों की एंट्री नहीं होती है। दंगल की तैयारियां शुरू हो चुकी है।

जानकारों के मुताबिक ये दंगल अंग्रेजों के जमाने से लगातार चला आ रहा है। इस दंगल में तमाम युवा और बुजुर्ग महिलाएं अखाड़े में आमने-सामने होती हैं।

गांव में अंग्रेजी हुकूमत करती थी जुल्म

हमीरपुर जिले के मुस्करा क्षेत्र के लोदीपुरा निवादा गांव में आज भी अंग्रेजों के जमाने से शुरु हुई दंगल की परंपरा कायम है। गांव के बुजुर्ग श्रीराम राजा पाठक बताते हैं कि ब्रिटिश हुकूमत में फौजों ने यहां लोगों काफी अत्याचार किया था। फौज के जुल्म से गांव वाले काफी परेशान थेय़ घरों में पुरुषों को रहने नही दिया जाता था। उस दौरान महिलाओं ने अपनी हिफाजत के लिए कुश्ती के दांवपेंच सीखने शुरू कर दिए थे।

आत्मरक्षा के लिए सीखी कुश्ती

वहीं, एक रिटायर्ड शिक्षक जगदीश चंद्र जोशी ने जानकारी देते हुए बताया कि अंग्रेजों के अत्याचार से गांव के पुरुष अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग जाते थे, लेकिन महिलाओं ने अंग्रेजी फौजों से निपटने के लिए कुश्ती के सभी दांव घर के आंगन में सीख लिए। तभी से गांव में महिलाओं ने अनोखे दंगल का आगाज हुआ था।

दंगल से पहले सूची तैयार होती है

ये दंगल का त्यौहार रक्षाबंधन के अगले दिन होता है। इस दौरान पूरे गांव की महिलाएं शामिल होकर दंगल का हिस्सा बनती हैं। बताया जाता है कि दंगल से कुछ दिन पहले गांव की महिलाएं अपने घरों में जवारे बोती हैं। जिसके बाद दंगल के दिन मंगल गीत गाते हुए अखाड़े तक पहुंचती हैं। दंगल में खासकर घूंघट वाली महिलाओं की कुश्ती होती है। गांव की प्रधान गिरजा देवी ने बताया कि दंगल में कुश्ती करने वाली महिलाओं की पहले सूची तैयार की जाती है।

पुरुषों की नो एंट्री

इस बार दंगल का आयोजन गांव के बीच बाजार में किया जाना है। गिरिजा देवी ने कहा कि इस बार के दंगल में कोरोना प्रोटोकॉल का पूरी तरह से पालन किया जायेगा। प्रधान के पति नाथूराम वर्मी ने जानकारी देते हुए बताया कि दंगल में बेहतर प्रदर्शन करने वाली महिलाओं को पुरस्कृत किया जाता है। इस दंगल में सिर्फ महिलाएं व किशोरियां ही भाग लेती हैं। पुरुषों को दंगल के पास भी भटकने नहीं दिया जाता है।

पुरुषों को खदेड़ देती हैं महिलाएं

गांव की ग्राम प्रधान गिरजा देवी वर्मा ने बताया कि रक्षाबंधन के अगले दिन दोपहर बाद महिलाओं का दंगल होता है, जिसमें सिर्फ महिलायें ही प्रवेश करती है। दंगल में पुरुषों की इन्ट्री नहीं होती है। दंगल के चारो ओर पुरुषों पर नजर रखने के लिए महिलाओं की एक टुकड़ी लाठी-डंडे से लैस होकर मुस्तैद रहती है। किसी पुरुष ने दंगल में प्रवेश करने का प्रयास भी किया तो अखाड़े के बाहर इन्हें महिलायें खदेड़ देती हैं।

बुजुर्ग महिलाएं बजाती है ढोल

लोदीपुर निवादा गांव की प्रधान ने दंगल की विशेषता बताते हुए है कहा कि इस दंगल में गांव की बुजुर्ग महिलाएं की अखाड़े में ढोल लेकर आती हैं और वहीं ढोल की ताल पर घूंघट वाली महिलाओं का उत्साह बढ़ाती हैं।

इस दंगल में कम से कम डेढ़ दर्जन से अधिक कुश्तियां होती हैं, जिसमें गांव की बुजुर्ग महिलाओं में अखाड़े में गुत्थमगुत्था होती है। अखाड़े में गद्दा बिछाया जाता है, ताकि कुश्ती के दौरान किसी महिला को किसी भी प्रकार की चोट न आए।

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