October 27, 2021 11:55 am
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Guru Purnima: हमारी संस्कृति को याद दिलाता है ये पर्व

Guru Purnima: हमारी संस्कृति को याद दिलाता है ये पर्व

लखनऊ: ‘गुरु गोविंद दोऊ खड़े, काके लागू पाय, बलिहारी गुरु आपने गोविंद दियो बताय’, एक छात्र के जीवन में इन पक्तियों का बहुत महत्त्व होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि गुरु ही छात्र को दिशाओं से मिलाता है और गुरु ही सही-गलत को समझाता है। छात्र के जीवन को गति देने में भी एक गुरु का ही योगदान रहता है, गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर भारतखबर.कॉम आपको ऐसे ही मार्गदर्शकों (गुरु) की महतवपूर्ण बातों से अवगत कराने जा रहा है…

हमारी संस्कृति को याद दिलाती है गुरु पूर्णिमा: आंचल प्रवीण श्रीवास्तव

पिछले कई सालों से अलग-अलग संस्थानों में पत्रकारिता की शिक्षा देने वालीं आंचल श्रीवास्तव का कहना है कि गुरु पूर्णिमा हमें संस्कृति की याद दिलाती है। उन्होंने कहा, ‘वेस्टर्न कल्चर में ढलते-ढलते हम शिक्षक दिवस (टीचर्स डे) को तो धूम-धाम से मनाते हैं लेकिन सनातन धर्म को याद दिलाने वाली गुरु पूर्णिमा को कहीं न कहीं भूलते जा रहे हैं। ये दिन हमें हमारे गुरुओं को याद दिलाता है। वही गुरु जिन्होंने ईश्वर से मिलाया, वही गुरु जिन्होंने परिश्रम का पाठ पढ़ाया, वही गुरु जिन्होंने मनुष्य के अन्दर प्यार की भावना जगाई, वही गुरु जिन्होंने त्याग की परिभाषा समझाई।’

Guru Purnima: हमारी संस्कृति को याद दिलाता है ये पर्व
आंचल प्रवीण श्रीवास्तव (Asst. Professor)

आंचल बताती हैं कि आधुनिकीकरण के इस दौर में सब कुछ बदलता जा रहा है। एक जमाना वो था जब गुरुदक्षिणा देने के लिए एकलव्य ने अपना अंगूठा काट दिया था। उन्होंने कहा, ‘ईश्वर से मिलाने का श्रेय गुरु को ही जाता है। हिंदू धर्म में गुरु पूर्णिमा का विशेष महत्व है, हमें इस महत्त्व को बरक़रार रखना चाहिए। ये हमारी संस्कृति से जुड़ा पर्व है और हमें इसे भी धूम-धाम ने मनाना चाहिए।’

असीमित है गुरु-शिष्य का रिलेशन :नीरज सिंह

वहीं पत्रकारिता जगत में नाम कामने के बाद इस विधा में दिलचस्पी रखने वाले छात्रों को पढ़ाने वाले नीरज सिंह का कहना है कि दिनों के हिसाब से टीचर और स्टूडेंट्स का रिलेशन नहीं दर्शाया जा सकता। दिनों का महत्व जरूर होता है लेकिन गुरु और शिष्यों के बीच दिनों से ज्यादा समय महत्व रखता है। उन्होंने कहा, टीचर हर दिन स्टूडेंट्स को कुछ न कुछ सिखाता है और स्टूडेंट्स द्वारा दिया गया फीडबैक उसके लिए ज्यादा मायने रखता है।

Guru Purnima: हमारी संस्कृति को याद दिलाता है ये पर्व
नीरज सिंह (Asst. Professor)

’उन्होंने कहा, ‘एक टीचर के लिए यह महत्वपूर्ण होता है कि उसका पढ़ाया हुआ स्टूडेंट् कार्यक्षेत्र में क्या कर रहा है। अगर स्टूडेंट् अपनी फील्ड में अच्छा कर रहा है, नाम कमा रहा है, उपलब्धियों तक पहुंच रहा है, तो टीचर को अपनी मेहनत पर गर्व होता है। टीचर को इससे फर्क पड़ता है कि उसका पढ़ाया हुआ छात्र असल जिंदगी में क्या कर रहा है। अगर छात्र कामयाब है तो टीचर उससे ज्यादा खुद को कामयाब मानता है। शिष्य भले ही टीचर्स डे या गुरु पूर्णिमा को भूल जाए लेकिन उसे अपनी गुरु को दी हुई सीख कभी नहीं भूलनी चाहिए।’

 

 

 

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