graduity 00000 हंगामे के बीच लोकसभा में पारित हुआ ग्रेच्युटी बिल, जानें फायदे

नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा लोकसभा के पटल पर रखे गए उपदान भुगतान विधेयक 2017 को लोकसभा में सर्वसम्मति से पास कर दिया गया  है। इस बिल के पास होने के बाद निजी क्षेत्र और सरकार के अधीन सार्वजनिक उपक्रम या स्‍वायत्‍त संगठनों के कर्मचारियोंम के उपदान की अधिकतम सीमा में वृद्धि होगी और जो केंद्र सरकार के कर्मचारियों के अनुसार सीसीएम नियमावली के अधीन शामिल नहीं होगा। आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग और पीएनबी धोखाधड़ी मामले समेत अन्य मुद्दों पर विभिन्न दलों के भारी हंगामे के बीच सदन ने इस विधेयक को ध्वनि मत से मंजूरी प्रदान कर दी।graduity 00000 हंगामे के बीच लोकसभा में पारित हुआ ग्रेच्युटी बिल, जानें फायदे

इसके तहत केंद्र सरकार में निरंतर सेवा में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘प्रसूति छुट्टी की अवधि’ को अधिसूचित करने का प्रावधान किया गया हैलोकसभा में श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने उपदान भुगतान (संशोधन) विधेयक 2017 को पारित करने के लिये पेश किया। गौरतलब है कि अभी दस या उससे अधिक लोगों को नियोजित करने वाले निकायों के लिए उपदान भुगतान अधिनियम 1972 लागू है जिसके तहत कारखानों, खानों, तेल क्षेत्रों, बागानों, पत्तनों, रेल कंपनियों, दुकानों या अन्य प्रतिष्ठानों में लगे कर्मचारी शामिल हैं जिन्होंने पांच साल की नियमित सेवा प्रदान की है। इसके तहत उपदान संदाय की योजना अधिनियमित की गई थीष अधिनियम की धारा 4 के अधीन ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा वर्ष 2010 में 10 लाख रुपये रखी गई थी।

इस अधिनियम को लागू करने का मुख्‍य उद्देश्‍य है सेवानिवृत्ति के बाद कामगारों की सामाजिक सुरक्षा, चाहे सेवानिवृत्ति की नियमावली के परिणामस्‍वरूप सेवानिवृत्ति हुई हो या फिर शरीर के महत्‍वपूर्ण अंग के नाकाम होने से शारीरिक विकलांगता के कारण सेवानिवृत्ति हुई हो। टिप्पणिया विधेयक के उद्देश्य एवं कारणों में कहा गया है कि उपदान संदाय संशोधन विधेयक 2017 में अन्य बातों के साथ साथ अधिनियम की धारा 2क का संशोधन करने का प्रस्ताव किया गया है जिससे सरकार को निरंतर सेवा विधेयक में शामिल महिला कर्मचारियों को वर्तमान 12 सप्ताह के स्थान पर ‘प्रसूति छुट्टी की अवधि’ को अधिसूचित किया जाए,ताकि प्रसूति सुविधा संशोधन अधिनियम 2017 के माध्यम से प्रसूति छुट्टी की अवधि को 12 सप्ताह से बढ़ाकर 26 सप्ताह कर दिया जाए।

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