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अलविदा 2018: जब सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मचा दी थी हलचल

जजों ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस अलविदा 2018: जब सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मचा दी थी हलचल

आजादी के बाद देश के इतिहास में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ जब  सुप्रीम कोर्ट के चार न्यायाधीशों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की कर अदालत की कार्य शैली पर सवालिया निशान लगा दिए थे। गौरतलब है कि शीर्ष अदालत की समस्याओं की सूची बनाकर जनवरी 2018 में तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश (दीपक मिश्रा) के खिलाफ बगावत का कदम उठाकर सभी को चौंका दिया। जजों ने ‘चयनात्मक तरीके से’ मामलों के आवंटन और कुछ न्यायिक आदेशों पर सवाल उठाए थे। इससे न्यायपालिका और भारत की राजनीति में तूफान आ गया था।

 

जजों ने की थी प्रेस कॉन्फ्रेंस अलविदा 2018: जब सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मचा दी थी हलचल
अलविदा 2018: जब सुप्रीम कोर्ट के 4 जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मचा दी थी हलचल

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चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद उच्चतम न्यायालय में दूसरे सीनियर न्यायाधीश जे चेलमेश्वर समेत चार न्यायाधीशों के अनपेक्षित कदम ने उस वक्त शीर्ष अदालत में देश के शीर्ष न्यायाधीश और कुछ सीनियर न्यायाधीशों के बीच मतभेद को सामने ला दिया था।

तत्कालीन समय में नियुक्त 25 न्यायाधीशों ने कहा कि ये समस्याएं देश की सर्वोच्च न्यायपालिका को नुकसान पहुंचा रही हैं। उन्होंने कहा कि ये समस्याएं भारतीय लोकतंत्र को नष्ट कर सकती हैं। सर्वोच्च न्यायपालिका के दूसरे वरिष्ठतम न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. चेलमेश्वर सहित चार न्यायाधीशों ने अभूतपूर्व कदम उठाते हुए संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में न्यायपालिका और पर्यवेक्षकों को हैरान कर दिया था कि सार्वजनिक रूप से ऐसे असंतोष का खोखली हो रही संस्था में कैसे समाधान होगा।

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याद हो कि न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने ख़ुद भी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘अभूतपूर्व घटना’ बताया और कहा, ‘कभी-कभी उच्चतम न्यायालय का प्रशासन सही नहीं होता है और पिछले कुछ महीनों में ऐसी अनेक बातें हुई हैं जो अपेक्षा से कहीं नीचे हैं।’ उन्होंने अचानक आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस संस्था की संरक्षा के बगैर इस देश में ‘लोकतंत्र नहीं बचेगा’।

जे.चेलमेश्वर ने कहा कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह की पहली घटना है। न्यायमूर्ति चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर और न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ ने एक साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीखी आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने 12 जनवरी की सुबह प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा से मुलाकात की थी और ‘संस्थान को प्रभावित कर रहे मुद्दों को उठाया था।

आपको बता दें कि जे. चेलमेश्वर ने अपने आवास पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि इस संस्थान को संरक्षित किए बिना, इस देश का लोकतंत्र नहीं बचेगा। उन्होंने इस घटना प दुख जताते हुए कहा था कि इस तरह से प्रेस कॉन्फ्रेंस करना ‘बहुत ही कष्ठप्रद है। न्यायाधीन ने कहा कि चारों न्यायाधीश प्रधान न्यायाधीश को यह समझाने में विफल रहे कि कुछ चीजें व्यवस्थित नहीं हैं, इसलिए उन्हें सुधार करने चाहिए। दुर्भाग्य से हमारे प्रयास विफल हो गए, न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, ‘हम चारों को ही यकीन हो गया है कि लोकतंत्र दांव पर है’ और हाल के दिनों में कई घटनाएं हुई हैं’।

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उक्त मुद्दों के बारें पूछने पर उन्होंने कहा, ‘इनमें प्रधान न्यायाधीश द्वारा मुकदमों का आवंटन भी शामिल’ है।
गौरतलब है कि जजों की यह टिप्पणी महत्वपूर्ण है, क्योंकि उच्चतम न्यायालय के समक्ष 12 जनवरी 2018 को ही संवेदनशील सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे सीबीआई के विशेष जज बीएच लोया की रहस्यमय परिस्थितयों में मृत्यु की स्वतंत्र जांच के लिए दायर याचिकाएं सूचीबद्ध थीं।

न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, ‘संस्थान और राष्ट्र के प्रति हमारी ज़िम्मेदारी है। संस्थान को बचाने के लिए कदम उठाने हेतु प्रधान न्यायाधीश को समझाने के हमारे प्रयास असफल हो गए हैं’। उन्होंने कहा, ‘यह किसी भी राष्ट्र, विशेषकर इस देश के इतिहास में असाधारण घटना है। न्यायपालिका की संस्था में भी असाधारण घटना है। यह कोई प्रसन्नता की बात नहीं है कि हम प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के लिए बाध्य हुए। लेकिन कुछ समय से उच्चतम न्यायालय का प्रशासन ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीने में ऐसी अनेक बातें हुई हैं जो अपेक्षा से कम थीं’।

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चारों न्यायाधीशों ने प्रधान न्यायाधीश को लिखा अपना सात पेज का पत्र भी मीडिया को दिया था। उन्होंने इसमें कहा है कि ‘देश के न्यायशास्त्र में यह अच्छी तरह से प्रतिपादित है कि प्रधान न्यायाधीश हम सभी में प्रथम है। न तो अधिक और न ही कम’ प्रेस कॉन्फ्रेंस में सभी न्यायाधीशों ने इन सवालों को बकवास बताया कि उन्होंने अनुशासन भंग किया है और कहा कि वे वह करना शुरू कर देंगे जो वे करते हैं। जस्टिस जे. चेलमेश्‍वर ने कहा, ‘हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। यह किसी भी देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है क्‍योंकि हमें यह ब्रीफिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। हमने ये प्रेस कॉन्‍फ्रेंस इसलिए की ताकि हमें कोई ये न कहे हमने अपनी आत्मा बेच दी है।

जे.रंजन गोगोई ने कहा था, ‘कोई भी अनुशासन भंग नहीं कर रहा है और यह जो हमने किया है वह तो राष्ट्र का कर्ज़ उतारना है’। न्यायमूर्ति गोगोई इस साल अक्टूबर में प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के सेवानिवृत्त होने पर नए प्रधान न्यायाधीश बन गए हैं। जजों से यह सवाल करने पर कि क्या वे चाहते हैं कि प्रधान न्यायाधीश पर महाभियोग चलाया जाए तो न्यायमूर्ति चेलमेश्वर ने कहा, ‘राष्ट्र को फैसला करने दीजिए। हालांकि बाद में कांग्रेस  प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाई जिसको अस्वीकार कर दिया गया था। लाया जिसको अस्वीकार कर दिया गया था। इस पर भी खूब सियासी घमासान हुआ था।

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महेश कुमार यादव

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