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हरिद्वार में गंगा बंदी शुरू, रोको गया गंगा का पानी

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उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार की पूरी अर्थव्यवस्था माँ गंगा पर निर्भर है। वैसे तो साल भर पतितपावनी मोक्षदायिनी माँ गंगा निरंतर बहते हुए अपने भक्तों का कल्याण करती है। लेकिन साल में एक बार गँगा बंदी होती है और इस दौरान बहुत कम संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार आते है। लेकिन ये वार्षिक गँगा बंदी भी यहाँ के गरीब वर्ग के लोगो के लिए वरदान साबित होती है।

2 11 हरिद्वार में गंगा बंदी शुरू, रोको गया गंगा का पानी

दरअसल यूपी सिंचाई विभाग द्वारा हर साल दशहरे से लेकर दीपावली तक गँगा का पानी रोक दिया है। हर की पौड़ी से लेकर कानपुर तक जाने वाली गंगनहर में साफ सफाई का काम होता है। इस दौरान हज़ारों लोग सुखी हुई गँगा में सिक्के और धातुएं बीनने का काम करते है। एक महीने तक इन लोगो की आजीविका गँगा बंदी पर ही निर्भर होती है। कभी कभी तो इन लोगो को सिक्कों के साथ ही सोने चांदी की बहुमूल्य की धातुएं भी मिल जाती है और इसे माँ गंगा का आशीर्वाद मानकर ये लोग भी अपना दीपावली का त्यौहार मनाते है।

हर की पौड़ी पर पानी न होने के चलते श्रद्धालु हरिद्वार का रुख नही करते। इससे यहाँ की अर्थव्यवस्था भी प्रभावित होती है। गँगा घाटों पर रहने वाले पंडितों और तीर्थ पुरोहितों को भी आर्थिक तंगी झेलनी पड़ती है। लेकिन ये तीर्थ पुरोहित भी मानते है कि पतितपावनी माँ गंगा निरंतर अपने भक्तों का कल्याण करती है। प्रवाह रुकने के बावजूद उनकी न सही सिक्के बीनने वाले लोगो की तो रोजी रोटी चलती रहती है।

मान्यता है कि माँ गंगा हमेशा अपने भक्तों का कल्याण करती है। इसलिए इसकी धारा का प्रवाह रुकने के बावजूद भी गरीब वर्ग के लोगो की रोजी रोटी चलती रहती है और माँ गंगा की कृपा से लोग ये खुशी खुशी दीपावली का त्यौहार मनाते है।

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