November 30, 2022 1:06 am
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प्रेस दिवसः जानें क्या है ‘प्रेस परिषद’ और इसके कार्य

प्रेस दिवसः जानें क्या है 'प्रेस परिषद' और इसके कार्य

प्रेस दिवसः प्रत्येक वर्ष 16 नवंबर को प्रेस दिवस मनाया जाता है। इस वर्ष भी पूरे देश में आज शुक्रवार को प्रेस दिवस मना रहे हैं। ऐसे में यह जानना हर एक भारतीय के लिए जरूरी है कि आखिर प्रेस दिवस को मनाने के पीछे क्या उद्देश्य है। आइए जानते हैं, प्रेस आयोग ने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम करने के उद्देश्य से एक प्रेस परिषद की कल्पना की थी। बाद में यह कल्पना साकार हुए और चार जुलाई 1966 को भारत में प्रेस परिषद की स्थापना की गई। इस परिषद ने 16 नंवबर 1966 से अपना विधिवत कार्य शुरू किया। तभी से प्रतिवर्ष 16 नवंबर का दिन “राष्ट्रीय प्रेस दिवस” के रूप में मनाया जाने लगा।

 

प्रेस दिवसः जानें क्या है 'प्रेस परिषद' और इसके कार्य
प्रेस दिवसः जानें क्या है ‘प्रेस परिषद’ और इसके कार्य

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गौर करने की बात है कि आज हम 43वां प्रेस दिवस मना रहे हैं। ऐसे में एक सवाल जरूर सभी के मन में आता है कि क्या वास्तव में प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा एंव पत्रकारिता में उच्च आदर्श कायम है..? सवाल यह भी है कि क्या पत्रकारों को उचित और जरूरी सुविधाएं मिल पा रहीं है? जो कि कई देशों में मिल भी रही हैं। उदाहरण के तौर पर कहा जाए तो एक अहम जरूरत है जीवन सुरक्षा बीमा,और पत्रकारों पर उनके कार्य करते वक्त यदि कोई हमला होता है तो उसमें विशेष कानून के तहत कार्रवाई हो।

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उक्त सभी सवालों का जवाब शायद वर्तमान पत्रकारिता परिदृश्य में नजर डालकर टटोला जाए तो तमाम पत्रकारों की मौत और धमकियां होगी। खैर कुछ भी हो पर राजनीतिक नुमांइदे मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहकर प्रेस की स्वतंत्रता की औपचारिक प्रतिबद्धता जरूर दिखाते रहते है।इस सब के बावजूद यह कहना गलत नहीं होगा कि प्रेस परिषद के गठन के बाद पत्रकारिता जगत में आमूल-चूल परिवर्तन हुए हैं। ‘प्रेस परिषद’ मीडिया को निष्पक्ष और समतल बनाने के लिए फेक न्यूज जैसे मामलों पर सिकंजा कसने का काम करती है। भारतीय प्रेस परिषद ने अपनी रिपोर्ट में कहा भी है ‘भारत में प्रेस ने ज्यादा गलतियां की है।अधिकारियों की तुलना में प्रेस के खिलाफ अधिक शिकायतें दर्ज हैं।

प्रेस परिषद’ प्रेस से प्राप्त या प्रेस के विरूद्ध प्राप्त शिकायतों सुनती है

बाता दें कि ‘प्रेस परिषद’ प्रेस से प्राप्त या प्रेस के विरूद्ध प्राप्त शिकायतों पर विचार करती है। परिषद को सरकार सहित किसी समाचारपत्र, समाचार एजेंसी, सम्पादक या पत्रकार को चेतावनी दे सकती है या भर्त्सना कर सकती है या निंदा कर सकती है। परिषद किसी सम्पादक या पत्रकार के आचरण को गलत ठहरा सकती है।गौरतलब है कि परिषद के निर्णय को किसी भी न्यायालय में चुनौती नहीं दी जा सकती।काफी मात्रा में सरकार से घन प्राप्त करने के बावजूद इस परिषद को काम करने की पूरी स्वतंत्रता है। इसके संविघिक दायित्वों के निर्वहन पर सरकार का किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है।

समाचार पत्रों से समाज बदलता है

समाचार पत्रों से समाज बदलता है यदि पत्रकारिता समाज की हू ब हू तस्वीर दिखाए। लोकिन कभी-समाज पत्रिकारिता को भी बदल देता जब पत्रकारिता रंगीन होने लग जाए। इसलिए नैतिक मूल्यों एवं सीमाओं को ध्यान में रखकर पत्रकारों को समाज की वास्तविक तस्वीर दिखानी चाहिए। खबरों से विचार जन्म लें तो उनका स्वागत करना चाहिए।वहीं विचारों पर निकले समाचार अभिशाप हैं।वर्तमान में ऐसा काफी हद तक देखा जा रहा है!

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 महेश कुमार यादव

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