September 22, 2021 9:24 pm
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Fatehpur: जिले में गौवंश के लिए बनाई गई खास योजना

Fatehpur: जिले में गौवंश के लिए बनाई गई खास योजना

फतेहपुर: सरकार कई तरह से गौवंशों के पोषण के लिए धन का आवंटन कर रही है। इसके बाद भी उन्हें सही तरीके से पोषक आहार नहीं मिल पा रहा है। इसी को देखते हुए जिले के गौवंशों के लिए विशेष योजना बनाई जा रही है।

इसके अंतर्गत सभी 38 गौशालाओं में पौष्टिक पौधों की श्रृंखला तैयार की जाएगी। जिससे गौशालाओं में रहने वाले पशुओं के लिए सुलभ और पौष्टिक आहार मिल सके। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे सभी मौसम में समान रूप से लाभ लिया जा सकेगा। जिले के पशु उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर एसके तिवारी ने गौवंशों के स्वास्थ्य के लिए इस योजना को शुरू किया है।

भेवली, ऐरायां, बोरवा, कोंडार, बड़नपुर, शाखा, तारापुर, बैजानी, जमलामऊ, मलाका, देवलान सहित जिले भर की गौशालाओं में अनुमान के अनुसार प्रति गौशाला 100 से 150 पशु हैं। इनके भोजन के लिए सरकार की ओर से प्रति पशु 30 रुपये के हिसाब से राशन मिलता है। जिसमें भूसा, दाना, हरा चारा, चूनी-चोकर और खरी शामिल है। लेकिन इन सबके बीच गौवंशों को पर्याप्त पोषक आहार मिलने में समस्या होती है।

कई बार आवश्यकता से ज्यादा पशु यहां आ जाते हैं और ऐसे में उन्हें तत्काल बजट के अनुसार पोषण दे पाना संभव नहीं हो पाता है। इसी समस्या से निपटने के लिए बीते दिनों जिलाधिकारी अपूर्व दुबे ने गौशालाओं में नेपियर घास रोपी थी। जिससे गौवंशों को हरे चारे की उपलब्धता बनी रहे।

Fatehpur: जिले में गौवंश के लिए बनाई गई खास योजना

इसी से प्रेरित होकर पशु उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर एसके तिवारी ने गौशालाओं में स्पेशल पेड़-पौधे लगाने की योजना बनाई। जिससे लंबे समय तक पशुओं पौष्टिक आहार तो मिलता ही रहे साथ ही लागत शून्य हो। इसी के तहत उन्होंने जिलाधिकारी अपूर्वा दुबे से अपनी योजना बताई और उसे लागू कर दिया।

उन्होंने जिले की सभी गौशालाओं में विशेष पेड़ों को लगाने के लिए बीज की व्यवस्था की। डॉक्टर एसके तिवारी कहते हैं उनके इस काम में वन विभाग सदर रेंज के आरएल सैनी ने भरपूर साथ दिया। ऐसे में सभी 38 गौशालाओं में सहजन, बबूल और सु-बबूल के बीज भेजे गए हैं। इनमें सहजन भरपूर पोषण युक्त पेड़ होता है। जबकि सु बबूल की खास विशेषता है कि पौष्टिक होने के साथ ही इसमें कांटे नहीं होते हैं। ऐसे में इसे काटने में भी आसानी होती है, साथ ही पशु स्वयं ही पेड़ से आहार ले सकते हैं। इन्हें गौशालाओं के चारों ओर बनाए गए खंती में लगाया जाएगा। जिससे खाली स्थान का बेहतर उपयोग हो सके।

“गौवंशों के स्वास्थ्य को देखते हुए पौधरोपण की विशेष कार्ययोजना बनाई गई है। शनिवार से इसका काम शुरू हो जाएगा। इससे जहां गौवंशों को पोषक युक्त आहार मिलेगा तो वहीं बाहर से चारा खरीदने में खर्च होने वाली धनराशि भी बचेगी। इस तरह एक साथ दो तरीके से हमें लाभ मिलेगा।”

डॉक्टर एसके तिवारी

उप मुख्य चिकित्साधिकारी पशु, फतेहपुर।

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