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किसानों ने टाला देशव्यापी प्रदर्शन, आज मनाएंगे काला दिवस, कोरोना काल के चलते लिया फैसला

farmers protest 3 किसानों ने टाला देशव्यापी प्रदर्शन, आज मनाएंगे काला दिवस, कोरोना काल के चलते लिया फैसला

आज किसानों को धरने पर बैठे हुए पूरे 6 महीने हो गए हैं। आज यानि 26 मई को सभी किसानों द्वारा राष्ट्रीय आंदोलन किया जाना था। लेकिन कोरोना के चलते अब इस प्रदर्शन को टाल दिया गया है। किसानों की माने तो देश अभी भी कोरोना से जूझ रहा है। ऐसे में वह यह नहीं चाहते कि किसानों के कारण कोरोना गांव गांव फैले। जिसके चलते इस आंदोलन को टाल दिया गया है। अब किसान काले झंडे फहराकर ही सरकार के खिलाफ अपना प्रदर्शन जाहिर करेंगे। आंदोलन में किसी भी तरह का सभा का आयोजन नहीं किया जाएगा।

26 मई का दिन होगा ब्लैक डे

आज किसानों को आंदोलन करते हुए 6 महीने हो चुके हैं, और उनका प्रदर्शन अभी भी जारी है। लेकिन सरकार ने अभी तक कृषि कानूनों को वापिस नहीं लिया है। किसानों की माने तो उनका प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार इन बिलों को वापिस नहीं ले लेती । ऐसे में किसान 26 मई के दिन को ब्लैक डे के रूप में मनाएगी।

किसानों को मिला कई पार्टियों और संगठनों का साथ

किसान आंदोलन के शुरू होने के बाद कांग्रेस पार्टी के साथ कई अन्य संगठन भी आंदोलन के समर्थन में उतर आए। जिसके बाद सभी पार्टियों ने बीजेपी को घेरना शुरू कर दिया और किसान आंदोलन ने धीरे धीरे राजनीति का रूप ले लिया। इसीलिए किसान नेताओं ने अब यूपी और दूसरे राज्यों के चुनावों में भी भाजपा विरोध में खुलकर अपनी राजनीतिक भूमिका की घोषणा कर दी है।

सोशल मीडिया पर किया जाएगा प्रचार

कोरोना के कारण आंदोलन को टाल दिया गया है। ऐसे में आज किसान अब कृषि कानून विरोधी आंदोलन को छह महीने और मोदी सरकार के सात साल पूरे होने पर किसान संगठन बुधवार को काला दिवस मनाएंगे। संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसान संगठन इसकी पूरी तैयार कर चुका हैं। अब किसान गांव-गांव, और कार्यालयों पर काले झंडे लगाएँगे । इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पुतले भी फंूके जाएंगे । सरकार का विरोध करते हुए वह अपने फोटो व वीडियो इंटरनेट और सोशल मीडिया पर वायरल करेंगे।

सरकार से बात करने को किसान तैयार

किसान आंदोलन शुरू होने के बाद कई बार किसानों और सरकार के बीच बातचीत हुई। लेकिन किसी भी तरह से समस्या का कोई भी हल नहीं निकला। हांलाकि किसान अभी भी सरकार से बातचीत करने को तैयार हैं । लेकिन उनकी शर्त यह है कि सरकार कृषि कानूनों के मुद्दे पर ही बात करे।

कोरोना में कमजोर पड़ा आंदोलन !

देष में कोरोना की दूसरी लहर आने के बाद फिर से लाॅकडाउन लगाया गया। जिसके चलते कहीं ना कहीं किसान आंदोलन फीका नजर आने लगा। हालांकि इससे पहले देश में हुई 26 जनवरी की घटना ने भी किसान आंदोलन पर काफी बुरा असर डाला था। ऐसा लगने लगा था कि अब आंदोलन खत्म हो जाएगा। ऐसे में अब देखना यह होगा कि सरकार कब तक किसानों की मांगे मानती है या फिर ये प्रदर्शन यूं ही जारी रहता है।

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