September 28, 2021 2:04 am
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आरक्षण बिल पास कराने के लिए आठ लाख कर्मचारी हुए लामबंद

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लखनऊ। आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति संयोजक मण्डल कोर ग्रुप की मंगलवार को एक बैठक सम्पन्न हुई। जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है कि पदोन्नति में आरक्षण बिल पास कराने को लेकर अब आन्दोलन तेज किया जायेगा।

आरक्षण समर्थक कर्मचारियों ने कहा कि कि वर्तमान में चल रहे संसद सत्र में किसी भी राजनैतिक दल द्वारा लम्बे समय से लम्बित पदोन्नति में आरक्षण का 117वां बिल पास कराने के लिये चर्चा तक नहीं की गयी। सबसे बड़ा चौंकाने वाला मामला यह है कि आरक्षित सीट से जीत कर आने वाले सांसद व मंत्रीगण भी चुपचाप तमाशा देख रहे हैं।

संघर्ष समिति ने यह तय किया है कि सभी विभागों में जागरूकता अभियान चलाते हुए प्रदेश के 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों को आन्दोलन के लिये तैयार रहने का आह्वान किया जायेगा। सभी जिलों में आरक्षण बचाओ सम्मेलन करके एक बड़े आन्दोलन का आगाज किया जायेगा। संघर्ष समिति के नेताओं ने सभी राजनैतिक दलों के राष्ट्रीय अध्यक्षों व वरिष्ठ नेताओं से मिलने का समय मांगा है।

संघर्ष समिति संयोजक मण्डल द्वारा सभी राजनैतिक दलों से यह मांग उठायी गयी कि जो भी राजनैतिक दल अपने आप को आरक्षण समर्थकों का हितैषी बता रहे हैं वह यह ऐलान करें कि 2022 के यूपी विधान सभा चुनाव के घोषणा पत्र में पदोन्नति में आरक्षण बिल पास कराने का मुद्दा सबसे अहम होगा। सभी पार्टियां यह जवाब दें कि वे अपने घोषणा में इस मुद्दे को शामिल करेंगी अथवा नहीं।

आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा, आरपी केन, अजय कुमार, अनिल कुमार, प्रेमचन्द्र, श्यामलाल, लेखराम, अन्जनी कुमार, एचपी कौशल और अनिल कुमार ने कहा जहां एक तरफ सभी दल बाबा साहब द्वारा बनायी गयी संवैधानिक व्यवस्था पर बड़ी-बड़ी बातें करते हैं, वहीं पिछले 9 वर्षों से लोक सभा में पदोन्नति में आरक्षण का बिल लम्बित है। उस पर चर्चा करने की बात तो दूर, बन्द कमरे में भी उस पर बात करने से कतरा रहे हैं।

जबकि उन्हें यह नहीं पता है कि आरक्षण समर्थक अपने हक को पाने के लिये किसी भी हद तक जा सकता है। वह दिन दूर नहीं जब प्रदेश के प्रत्येक जनपद में आरक्षण समर्थक अपना सम्मेलन करके सरकार को यह बता देंगे कि उनके मुद्दे पर चुप्पी विधान सभा चुनाव में हानिकारक साबित होगी।

आरक्षण समर्थक लगातार अपने 8 लाख आरक्षण समर्थक कार्मिकों को वोट की चोट के आधार पर आरक्षण समर्थक पार्टी का चुनाव करने का आह्वान कर रहे हैं। जिसका परिणाम 2022 के चुनाव में देखने को मिलेगा।

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