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शराब की एक बोतल ने ली 10 हजार सैनिकों की जान, ये है इतिहास की सबसे मूर्खतापूर्ण लड़ाई

शराब की एक बोतल ने ली 10 हजार सैनिकों की जान, ये है इतिहास की सबसे मूर्खतापूर्ण लड़ाई

लखनऊ: आपने अब तक कई युद्ध के ऐतिहासिक किस्से सुने और पढ़े होंगे। उनकी लड़ाईयों और वीरता के तमाम किस्से आपके दिमाग में होंगे। मगर, आज हम आपको एक ऐसे युद्ध के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे इतिहास में युद्ध का नाम तक नहीं दिया जाता है।

इतिहास में कुछ ऐसे युद्ध का जिक्र भी आता है, जिनमें हानि तो बहुत हुई लेकिन इतिहासकार उसका जिक्र नहीं करते हैं। जिक्र न करने का कारण भी उनके हिसाब से तर्कसंगत हैं। दरअसल, ये युद्ध एक शराब की बोतल को लेकर हुआ था, जिसमें 10 हजार से ज्यादा सैनिकों ने अपनी जान गंवाई थी।

सन् 1788 की है बात

तो कहानी शुरू होती है सितंबर 1788 से। उस दौरान कई राज्य एकसाथ मिलकर अंब्रेला की तरह लड़ाई करते थे। इसमें ऑस्ट्रिया के सैनिकों का काफी योगदान होता था। यूरोप के कैरनसीब्स शहर को जब ऑस्ट्रिया की सेना कब्जा करने पहुंची तो एक घटना ने इस पूरे युद्ध का रूख बदल कर रख दिया।

विभिन्न भाषाओं के कारण मुश्किल था आपसी तालमेल

दरअसल, एक साथ मिलकर काम करने वाले राज्यों में ऑस्ट्रिया के साथ जर्मनी, फ्रांस, सर्बिया, पोलेंड चेक रिपब्लिक के सैनिक भी शामिल थे। इसे हैब्सबर्ग साम्राज्य भी कहा जाता था। अब चूंकि अलग-अलग राज्यों के सैनिकों की अलग भाषाएं होने के कारण इनमें आपसी तालमेल काफी मुश्किल होता था। अधिकारियों के आदेश को सभी तक पहुंचाना भी बहुत मुश्किल काम होता था।

अधिकतर समय तो इसी में बीत जाता था। उस दौर में ऑस्ट्रिया और तुर्क में युद्ध चल रहा था। ये सैनिक उस वक्त के ऑटोमेन एंपायर यानी तुर्क सेना के खिलाफ एकजुट थे। कहा जाता है कि 21 सितंबर की रात एक गलतफहमी ने सेना के 10 हजार सैनिकों की जान ले ली।

हुआ कुछ यूं कि टिमिस नदी के किनारे जब घुड़सवार सैनिक पहुंचे तो रात के समय अंधेरा होने की वजह से वहां शांति दिखी और आसपास किसी तुर्की सेना के न होने के कारण ऑस्ट्रियाई सैनिकों ने रात में वहीं विश्राम करने का इरादा किया। नदी के किनारे ही थोड़ी दूर रोमानिया के नागरिकों का शिविर था। घुड़सवार जब वहां ये पता करने गए कि कहीं ये तुर्की सेना का शिविर तो नहीं है, तो वहां रोमानिया के नागरिक मिले।

शराब की एक बोतल बनी युद्ध की वजह

मित्र देश के सैनिकों को देख रोमानियां के लोगों ने सैनिकों को शराब का न्यौता दे दिया। थके-हारे सैनिकों ने भी हां कर दी और बैठकर शराब पीने लगे। शराबनोसी के इस कार्यक्रम को देख कुछ पैदल सैनिक भी आ धमके और उन्होंने भी शराब पीने की इच्छा जताई। चूंकि अब शराब की सिर्फ एक ही बोतल बची थी तो शराब पी रहे सैनिकों ने मना कर दिया। इस पर पैदल सैनिक आक्रोशित हुए और भड़क उठे। नशे में चूर सैनिक हाथा-पाई पर उतारू हो गए।

वहीं, नदी के दूसरे किनारे कुछ ऑस्ट्रियाई सैनिक जो बिना शराब पिए जग रहे थे कि कहीं तुर्क सेना उन अंधेरे में हमला न कर दे, उन्हें जैसे ही गोलियों की आवाज आई तो वो सचेत हो गए और उन्हें लगा कि हमला हो चुका है। बाकि सैनिकों को सचेत करने के लिए वे तुर्क…तुर्क चिल्लाने लगे। इन सैनिकों की आवाज जब शराब के लिए लड़ रहे सैनिकों के कान में पहुंची तो उन्हें भी यही लगा की तुर्क सेना ने हमला कर दिय़ा है। उन्होंने नदी के दूसरी ओर गोलियां चलानी शुरू कर दी।

गलतफहमी के शिकार हुए सैनिक

गोलियों की गड़गड़ाहट के बीच ऑस्ट्रियाई सैनिकों की अगुवाई कर रहे एक जर्मनी सैनिक ने पूरा विवाद समझ लिया और रोकने के लिए हॉल्ट-हॉल्ट यानी रुक जाओ चिलाएं। अब चूंकि सैनिकों की एक बड़ी टुकड़ी जो अनुवाद के ही सहारे रहते थी, उन्हें लगा की तुर्की सेना अल्लाह-अल्लाह चिल्ला रही है। उस दौरान तुर्की सैनिक अल्लाह का नाम लेकर ही युद्ध लड़ा करते थे।

जर्मन सैनिक का हॉल्ट शब्द आग में घी का काम कर गया और लड़ रहे सैनिकों को पूरा विश्वास हो गया कि तुर्की सैनिक आ गए हैं। भयानक अंधेरे में सैनिक आपस में ही गोलियां चलाने लगे। रातों-रात इस लड़ाई में 10 हजार से ज्यादा सैनिक अपनी जान गंवा चुके थे।

कैरनसीब्स की जंग के नाम से भी फेमस

इतिहास में इसे सबसे मूर्खतापूर्ण युद्ध कहा जाता है। इसे कैरनसीब्स की जंग भी कहते हैं। वहीं, जब दो दिन बाद तुर्की सेना यहां आई तो उन्हें किसी से लड़ने की जरुरत नहीं पड़ी, क्योंकि यहां पहले से ही दुश्मन मारे जा चुके थे।

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