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क्या बूंद-बूंद से समंदर बनाना चाहते हैं अखिलेश, क्यों छोटे दलों और बागी विधयकों से बढ़ा रहे नजदीकी?

मिशन 2022: यूपी में ब्राह्मण राजनीति, अब अखिलेश यादव ने की अहम बैठक

यूपी में विधानसभा चुनाव का वक्त अब बहुत ही करीब है। विधायकों की संख्या को लेकर सपा के मुखिया अखिलेश यादव छोटी-छोटी पार्टियों बसपा और बीजेपी के बागी विधायकों को सपा से जोड़ने का काम कर रहे हैं। उनकी कोशिश है कि प्रदेश के हर इलाके में अपनी पार्टी से छोटे दलों के साथ गठबंधन को अमली जामा पहनाते दिख रहे है।

बता दें कि इसी साल अखिलेश ने जयंत चौधरी के साथ 2022 का चुनाव लड़ने का एलान किया था। किसान आंदोलन के चलते राजनीति को मजबूत बनाने के लिए किसान महापंचायत में ये फैसला लिया गया था। लेकिन कुछ दिनों से दोनों एक दूसरे के साथ दिखाई नहीं दे रहे हैं। ऐसे में इस गठबंधन को लेकर बाते बनने लगी है कि दोनों पार्टियों में सीटों को लेकर रस्साकशी चल रही है।

यूपी की विधानसभा में सपा के अभी 49 विधायक है वहीं आरएलडी के पास कोई भी विधायक नहीं है। खुद 2019 में बीजेपी की लहर में जयंत चौधरी भी बागपत से लोकसभा का चुनाव हार गए थे। लेकिन लगातार चले रहे किसान आंदोलन और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जाट बिरादरी पर इसके असर ने जाटों से जुड़ी राजनीति करने वाले राष्ट्रीय लोक दल में न जान फूंकी है।

वहीं सपा को भी पश्चिम यूपी की घनी मुस्लिम आबादी वाली सीटों पर ठीक-ठाक वोट मिलने की उम्मीद है और 2022 में दोनों पार्टियों की कोशिश 100 सीटों पर जाट और मुसलमान बिरादरी के वोटरों को जोड़ने का काम करेगी। आरएलडी की पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लगभग 13 ज़िलों में अच्छी पकड़ और मज़बूत कैडर है जो किसान आंदोलन से पुनर्जीवित हुआ है और उम्मीद जताई जा रही है कि सपा-आरएलडी का गठबंधन पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसानों की बीजेपी से नाराज़गी का फ़ायदा उठा सकता है।

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