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विजयदशमी 2021 : दशहरे का नवरात्र से क्या है कनेक्शन, जानें क्या कहती है पौराणिक कथा

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हिंदू व सनातन धर्म में हर एक नियम व विधान  का महत्व ऋषियों व मुनियों की वाणी व पौराणिक कथाओं पर आधारित होता है। इसी प्रकार असत्य पर सत्य की विजय का त्यौहार दशहरा व विजयदशमी हर वर्ष नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता है। अश्विन मास शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी शारदीय नवरात्रि के अंतिम दिन रावण दहन सदियों से चला आ रहा है। लेकिन कई लोगों को यह ज्ञात नहीं आखिर क्यों नवरात्रि के दसवें दिन रावण दहन किया जाता है यानी नवरात्रि और दशहरा में क्या संबंध है तो आइए आज हम आपको नवरात्रि और दशहरा कनेक्शन से जुड़ी पौराणिक कथा से रूबरू कराते हैं।

नवरात्रि और दशहरा/विजयदशमी से जुड़ी पौराणिक कथा

मां सीता के हरण के बाद रावण दहन और नवरात्रि में नौ देवियों की पूजन में क्या कनेक्शन है। इस बात को आज हम आपको पौराणिक कथा के आधार पर बताने जा रहे। पौराणिक कथाओं के अनुसार मां सीता की खोज भगवान श्री राम ने लंका पर चढ़ाई और कई दिनों तक रावण, उसके पुत्रों व सैनिकों संग युद्ध चल लेकिन को परिणाम नहीं निकल रहा था ऐसे में भगवान रामचंद्र ने ब्रह्मा जी से रावण पर विजय प्राप्त करने का उपाय पूछा। उपाय बताते हैं ब्रह्मा जी ने राम से कहा कि मां चण्डी को प्रसन्न कर कर ही आप रावण पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। भगवान श्रीराम ने समुद्र तट पर बैठकर मां चंडी का दुर्लभ व्रत, पूजन हवन व 108 नीलकमल की व्यवस्था कर 9 दिनों तक पूजा आराधना की। वहीं दूसरी ओर लंका में बैठे रावण ने विजय व अमरता के वरदान के लिए मां चण्डी का पाठ आरंभ कर दिया। इंद्र देवता ने इस बात की सूचना पवन देवता के माध्यम से श्री रामचंद्र तक पहुंचाएं इसके बाद विचार विमर्श किया गया। और निर्णय लिया गया कि मां चण्डी की पूजा यथासंभव पूर्ण होने दी जाए।

राम ने अपना हक शुरू किया लेकिन रावण की माया से हवन सामग्री में से नीलकमल गायब होने लगता है। दुर्लभता से प्राप्त हुए नीलकमल तुरंत व्यवस्था करना अत्यंत मुश्किल था ऐसे में भगवान श्रीराम का शंकर टूटा हुआ नजर आ रहा था कि कुछ ही देर में श्री राम को याद आया कि उन्हें कमलनयन नवकंच लोकल भी कहा जाता है। ऐसे में उन्होंने अपनी एक आंख यज्ञ में आहुति देने का निर्णय और अपनी तीर से अपने एक नेत्र को अर्पित करने के लिए निकालना जा ही रहे थे तभी मां चण्डी प्रकट हो गई और उन्होंने कहा कि राम में तुमसे प्रसन्न और तुम्हें विजय का आशीर्वाद देती हूँ। 

वहीं दूसरी ओर रावण भी मां चण्डी को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ कर रहा था जिसको रोकना अत्यंत जरूरी था। ऐसे में भगवान हनुमान जी बालक का रूप धारण कर ब्राम्हण रूपी रावण इस सेवा की रावण प्रसन्न हो गया और बालक रूपी हनुमान से वरदान मांगने को कहा ऐसी में हनुमान जी को जिस मौके की तलाश थी वह मिल गया और उन्होंने बड़ी विनम्रता से रावण से अपने मंत्रों की हवन से एक अक्षर बदलने की विनती की। रावण इस रहस्य को समझ नहीं पाया और तथास्तु कह दिया। बालक रूपी हनुमान जी ने रावण से मंत्रों के उच्चारण में ‘ह’ अक्षर के स्थान पर ‘क’ उच्चारण करने के लिए कहा। जिससे अर्थ का अनर्थ होगी। जिससे मां चण्डी रुष्ट हो गई और रावण के सर्वनाश का शाप दे दिया।

इस कथा के अनुसार सर्वप्रथम श्री राम ने विजय प्राप्ति के लिए शारदीय नवरात्रों की पूजा आरंभ की और दसवें दिन रावण का संघार कर लंका पर विजय हासिल की यही कारण है, कि नवरात्रि के दशवें दिन दशहरा व विजयदशमी मनाया जाता है।

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