September 18, 2021 7:03 am
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इस दिन है कामिका एकादशी का व्रत, ये है शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा करने की विधी

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कामिका एकादशी व्रत को श्रेष्ठ व्रतों में से एक माना जाता है। 2021 श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के दिन कामिका एकादशी मनाई जाती है।
पापों से मिलती है मुक्ति 
कामिका एकादशी विष्णु भगवान की अराधना एवं पूजा का सर्वश्रेष्ठ समय होता है। ऐसा माना जाता है कि इस व्रत के पुण्य से पापों से मुक्ति मिल जाती है, साथ ही मनोवांछति कामनाओं की भी पूर्ति होती है। कामिका एकादशी को श्रेष्ठतम व्रतों में से एक माना जाता है। ऐसा भी मााना जाता है कि अगर आपकी कोई इच्छा लंबे समय से अधूरी है तो कामिका एकादशी का विधिवत व्रत रखकर आप भगवान के समक्ष उस कामना की पूर्ति की प्रार्थना करें। ऐसा करने से भगवान विष्णु आपकी कामना को जरूर पूरा करते हैं.
4 अगस्त को है कामिका एकादशी का व्रत 
गौरतलब है कि इस बार कामिका एकादशी का व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। कामिका एकादशी वाले दिन भगवान विष्णु के गदाधारी स्वरूप की पूजा करने का विधान है।
कामिका एकादशी व्रत का शुभ मुहूर्त 
एकादशी की तारीख 3 अगस्त दिन मंगलवार को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 4 अगस्त दिन बुधवार को दोपहर 3 बजकर 17 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार, इस वर्ष कामिका एकादशी का व्रत 4 अगस्त को रखा जाएगा। 5 अगस्त दिन गुरुवार को द्वादशी तिथि शाम को 5 बजकर 9 मिनट तक    रहेगी। ऐसे में आप द्वादशी में किसी भी समय पारण कर सकते हैं।  लेकिन व्रत पारण के लिए अति शुभ समय सुबह 5 बजकर 45 मिनट से सुबह 8 बजकर 26 मिनट के बीच रहेगा।
व्रत करने की विधि
एकादशी व्रत के नियम 03 अगस्त को सूर्यास्त के बाद से लागू हो जाएंगे। आप 3 अगस्त को सूर्यास्त से पहले साधारण भोजन करें। इसके बाद अगले दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि के बाद पूजा शुरू करने से पहले हाथ में अक्षत और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें। फिर पूजा शुरू करें। सबसे पहले भगवान विष्णु को फल-फूल, तिल, दूध, पंचामृत आदि अर्पित करें। इसके बाद कामिका एकादशी की व्रत कथा पढ़ें, और नैवेद्य चढ़ाएं। यदि निर्जल व्रत रह सकें तो सर्वोत्तम है, अन्यथा फलाहार ले सकते हैं। रात में भगवान का ध्यान व भजन कीर्तन करें। अगले दिन स्नान करने के बाद ब्राह्मण को भोजन कराएं और अपने अनुसार दान करें। इसके बाद ही स्वयं भोजन करें। दशमी की रात से लेकर द्वादशी के दिन तक ब्रह्मचर्य का पालन करें।
कामिका एकादशी की व्रत कथा
प्राचीन काल में एक गांव में पहलवान रहता था। पहलवान बहुत क्रोधी स्वभाव का था। एक दिन पहलवान का एक ब्राह्मण से झगड़ा हो गया। क्रोधवश पहलवान ने ब्राह्मण की हत्या कर दी। इससे पहलवान पर ब्रह्म हत्या का पाप लग गया। ब्राह्मण की हत्या का दोषी मानकर पहलवान का सामाजिक बहिष्कार कर दिया गया। पहलवान को अपनी गलती का अहसास हुआ और वो इसका प्रायश्चित करना चाहता था। एक दिन उसने एक साधु से पापों को दूर करने का उपाय पूछा। तब साधु ने पहलवान को कामिका एकादशी करने का व्रत करने की सलाह दी। साधु के कहने पर पहलवान ने कामिका एकादशी व्रत का विधि विधान से पूरा किया। एकादशी की रात पहलवान भगवान विष्णु की मूर्ति के पास सो रहा था। तभी अचानक से उसे सपने में भगवान विष्णु के दर्शन हुए। उन्होंने पहलवान से कहा कि वो उसकी भक्ति और प्रायश्चित करने की सच्ची भावना को देखकर प्रसन्न हैं। इसके बाद भगवान विष्णु ने उसे ब्राह्मण हत्या के दोष से मुक्त कर दिया।

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