गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर दिल्ली कूच, जनांदोलन की तैयारी

गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर दिल्ली कूच, जनांदोलन की तैयारी

देहरादून। गैरसैंण राजधानी बनाने की मांग को लेकर प्रदेश में चल रहे आंदोलन खत्म होने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार को गैरसैंण संघर्ष समिति के सैंकड़ों आंदोलनकारी दिल्ली में गरजे। समिति सदस्यों ने संसद के समीप प्रेस क्लब में आयोजित गोष्ठी में राजधानी गैरसैंण निर्माण का संकल्प भी लिया। बीते शनिवार को देश की संसद के समीप, भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रेस क्लब ‘प्रेस क्लब आॅफ इंडिया में उत्तराखंड गठन के 17 साल बाद भी प्रदेश की राजधानी गैरसैंण को घोषित न किए जाने से आक्रोशित राज्य गठन आंदोलनकारियों ने राजधानी गैरसैंण निर्माण के लिए राज्य गठन की तर्ज पर निर्णायक जनांदोलन छेड़ने का संकल्प लिया।

gairsend Capital
gairsend Capital

बता दें कि प्रदेश के जनविरोधी नेताओं द्वारा गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने को राव मुलायम की तरह उत्तराखंडद्रोही व शहीदों की शहादत को रौंदने वाला षडयंत्र बता कर सिरे से नकारते हुए चेतावनी दी कि ग्रीष्मकालीन की आड़ में यह उत्तराखंड के हितों व देश की सुरक्षा से खिलवाड़ न किया जाए। समिति ने कहा कि देहरादून में राजधानी थोपने वाला घ्रणित कार्य करने वालों को प्रदेश की जनता रौंद देगी। अब छात्र, युवा, महिलाएं व पूर्व सैनिक राज्य गठन आंदोलन की तर्ज पर जनांदोलन चला कर हर हाल में राजधानी गैरसैंण बनाने के लिए सरकार को मजबूर कर देगी।

वहीं संकल्प गोष्ठी का किया गया आयोजन राजधानी गैरसैंण निर्माण को लेकर प्रेस क्लब में विशेष गोष्ठी का भी आयोजन किया गया। संकल्प गोष्ठी में पधारे सभी आंदोलनकारियों ने विषय को लेकर आने विचार रखे। संकल्प गोष्ठी में सम्मलित सभी वक्ताओं ने राजधानी गैरसैंण के 25वीं वर्षगांठ पर बाबा मोहन उत्तराखंडी सहित सभी उत्तराखंडी शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि देते हुए राज्य गठन जनांदोलन के सभी समर्पित आंदोलकारियों के संघर्ष को नमन किया।

बता दें कि वक्ताओं ने इस बात पर आक्रोश प्रकट किया कि प्रदेश गठन के 17 साल बाद भी राज्य गठन जनांदोलन से पहले ही जनता व पूर्व उप्र सरकार द्वारा चयनित राजधानी गैरसैंण को विधिवत प्रदेश की राजधानी घोषित न करके प्रदेश के वर्तमान व भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ कर दिया है। जबकि तेलंगाना राज्य गठन के तीन चार साल में ही आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्र बाबू नायडू ने आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती को घोषित करने का सराहनीय कार्य किया। परन्तु उत्तराखण्ड बनने के 17 साल बाद भी जनभावनाओं व शहीदों के सपनों की निर्विवाद राजधानी गैरसैंण को घोषित करने की सुध प्रदेश की सरकारों में नहीं रही।

साथ ही वक्ताओं ने कहा कि हैरत की बात है गैरसैंण में जनता, आंदोलनकारियों, पूर्व उप्र सरकार की पंसद की राजधानी गैरसैण में ही जनता के भारी दवाब के बाद पूर्व सरकार ने प्रदेश का एकमात्र विधानसभा भवन बनाया है। विधायक व सचिवालय आदि का भी निर्माण गैरसैंण के भराड़ीसैण में हो चूका हैं। गैरसैंण में न केवल ग्रीष्मकालीन सत्र के साथ साथ शीतकालीन सत्र में सूचारू रूप से संचालित किया जा चूका है।

वहीं सरकार ही इच्छा शक्ति के अभाव व देहरादून में पंचतारा मोह के कारण प्रदेश की जनभावनाओं को बैशर्मी से रौंदा जा रहा हैं। उत्तराखंड सरकार व विपक्ष को तुरंत राजधानी गैरसैंण घोषित करने की मांग करते हुए दो टूक चेतावनी दी कि अगर बजट सत्र से पहले उत्तराखंड सरकार ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए प्रदेश की राजधानी गैरसैंण को घोषित नहीं की तो बजट सत्र में देहरादून में ‘गैरसैंण राजधानी घोषित करो या गद्दी छोड़ो’ के नारे के साथ विधानसभा का घेराव करके जनांदोलन का शंखनाद किया जाएगा।

गोष्ठी में भाग लेने वालों में उत्तराखंड क्रांति दल के शीर्ष नेता काशी सिंह ऐरी, भाकपा नेता समर भंडारी, गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के रघुवीर बिष्ट, उपपा के महामंत्री प्रभात ध्यानी, सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अवतार सिंह रावत, गैरसैंण राजधानी निर्माण अभियान के पीसी थपलियाल, छात्र नेता सचिन थपलियाल, पत्रकार प्रदीप सत्ती, मोहिनी रोतेला, धीरेंद्र प्रताप, सतीश धौलाखंडी सहित बडी संख्या में वरिष्ठ लोगों ने भाग लिया।

वहीं राजधानी गैरसैंण निर्माण अभियान से जुडे वरिष्ठ आंदोलनकारी देवसिंह रावत ने बताया कि 25 साल पहले उत्तराखंड क्रांति दल द्वारा 14 जनवरी 1992 को बागेश्वर के उत्तरायणी मेला में जारी उत्तराखंड राज्य व इसकी राजधानी गैरसैंण का ऐलान किया था। लेकिन बाद से अभी सरकारें इसे नजरअंदाज कर रहीं हैं। संकल्प गोष्ठी में जनगीतों का सामुहिक गायन किया गया।

बता दें कि इसमें सम्मलित होने वालों में राज्य आंदोलनकारी खुशहाल सिंह बिष्ट, प्रताप शाही, डा. बिहारी लाल जलंधरी, डीडी जोशी, महेश मठपाल, नंदन सिंह बिष्ट, सुरेश नौटियाल, संजय नौडियाल, दलवीर रावत, प्रेम सुंदरियाल, व्योमेश जुगरान, हरीश लखेड़ा, रोशन गौड़, गौड़, सतेंद्र रावत, संजय चौहान, कमल किशोर नौटियाल, किशोर रावत, सुषमा जुगरान, सतेंद्र प्रयासी, खुशाल जीना, किशोर नैथानी, सीडी तिवारी, मदनमोहन ढौंडियाल, बिलाल हुसैन, आंनद जोशी, मनोज आर्य, हरीश आर्य आदि मौजूद रहे।