दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा, क्या निजी स्कूल सातवें वित्त आयोग के वेतनमान दे रहें, यदि नहीं तो क्या कार्रवाई हुई

दिल्ली हाईकोर्ट ने पूछा, क्या निजी स्कूल सातवें वित्त आयोग के वेतनमान दे रहें, यदि नहीं तो क्या कार्रवाई हुई

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने सातवें वित्त आयोग के वेतनमान को लेकर गंभीरता दिखाते हुए दिल्ली सरकार व सभी स्थानीय निकायों से पूछा है कि क्या उनके अधीन निजी स्कूल अपने कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग की अनुसंशा के अनुसार वेतनमान दे रहे हैं या नहीं।
अगर नहीं दे रहे हैं तो आपने उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की। कोर्ट ने सभी से इसपर छह हफ्ते में जवाब देने को कहते हुए सुनवाई 19 अगस्त के लिए स्थगित कर दी।
मुख्य न्यायाधीश राजेन्द्र मेनन व न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने सभी से इसकी जांच छह हफ्ते में करने को कहा है। जांच कर उसकी रिपोर्ट हलफनामे के जरिये दाखिल करने को कहा है। एक संस्था सोसल ज्युरिस्ट के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल ने कोर्ट से कहा था कि सरकार के अधीन लगभग तीन हजार निजी स्कूल हैं, लेकिन उनमें से लगभग एक फीसद की सातवें वित्त आयोग की अनुसंशा के अनुसार अपने शिक्षकों व कर्मचारियों को वेतन दे रहे हैं। शेष स्कूलों के खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। जबकि सातवां वेतनमान 1 जनवरी, 2016 से ही लागू है।
उन्होंने कोर्ट से आग्रह किया है कि वह सरकार व निकायों को निर्देश दे कि वे सभी अपने अधीन निजी स्कूलों में सातवें वित्त आयोग की अनुसंशा के अनुसार वेतनमान दिया जाना सुनिश्चि करे और नहीं देने वाले के खिलाफ ठोस कार्रवाई करे।