भारतीय संघर्ष में इन मुस्लिम क्रांतिकारियों, कवियों और लेखकों का योगदान भुलाया नहीं जा सकता

भारतीय संघर्ष में इन मुस्लिम क्रांतिकारियों, कवियों और लेखकों का योगदान भुलाया नहीं जा सकता

नई दिल्ली। 15 अगस्त एक ऐसी तारिख है जिसको देश कभी नहीं भूल सकता है। या एक ऐसी ऐतिहासिक तारिख है जिसमें भारत ने आजादी पाई थी। इस दिन भारत ब्रिटिश हुकूमत से आज़ाद होकर एक स्वतंत्र राज्य बना था। इस दिन को हम स्वन्त्रता दिवस के नाम से जानते हैं। भारत को ब्रिटिश हुकूमत आज़ादी दिलाने में अनगिनत स्वतंत्रा सेनानियो ने अपनी जान की क़ुरबानी दी। हम देखते हैं कि जब भी स्वतंत्रा सेनानियो की बात आती हैं तो मुस्लिम स्वतंत्रा सेनानियो के नाम पर सिर्फ एक ही नाम सामने निकल कर आता हैं और स्वतंत्रता संग्राम के मुस्लमान क्रांतकारियो को इतिहास के पन्नो से मिटा दिया गया हैं। जब-कभी भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की बात होती है तो मुस्लिम समुदय से सिर्फ एक ही नाम सामने अत हैं। जहाँ देखो वहीं दिखाई देता है। लेकिन उसके अलावा किसी का नाम नज़र नहीं आता हैं।

 

 

मुस्लमान भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थे

बिस्मिल की कविता ने किया था अंग्रेजों को देश छोड़ने के लिए मजबूर, जन्म दिन विशेष पर

बता दें कि उस नाम से आप भी अच्छी तरह वाकिफ हैं, जी हाँ वह और कोई नहीं ‘अशफ़ाक़ उल्लाह खान’ का नाम दिखाई देता हैं। तो मुद्दा यह हैं कि क्या सिर्फ अशफ़ाक़ उल्लाह खान भारत के स्वतंत्रा आंदोलन में शामिल थे। जबकि ऐसा नहीं है। इसके अलावा एक और नाम हैं मौलाना अबुल कलाम आज़ाद” जिसे देखकर हमने भी यही समझ लिया कि मुसलमानो में सिर्फ मौलाना अबुल कलाम आज़ाद, अशफ़ाक़ उल्लाह खान के बाद दुसरे ऐसे मुस्लमान थे जिन्होंने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन का हिस्सा थे जिन्होने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन मे हिस्सा लिया था।

मुस्लमानो ने विदेशी आक्रमणकारियो से जंग लड़ते हुए अपनी जानो को शहीद किया

जानिए: आजादी के बाद भारत के प्रमुख युद्धों के बारे में

वहीं अगर अस्ल तारिख का गहन अध्यन किया जाये, तो आप देखेगे 1498 की शुरुआत से लेकर 1947 तक मुस्लमानो ने विदेशी आक्रमणकारियो से जंग लड़ते हुए अपनी जानो को शहीद करते हुए सब कुछ क़ुरबान कर दिया। इतिहास के पन्नों में अनगिनत मुस्लिम हस्तियों के नाम दबे पड़े हैं जिन्होने भारतीय स्वतंत्रा आंदोलन में अपने जीवन का बहुमूल्य योगदान दिया जिनका ज़िक्र भूले से भी हमें सुनने को नहीं मिलता हैं। जबकि अंग्रेजों के खिलाफ भारत के संघर्ष में मुस्लिम क्रांतिकारियों, कवियों और लेखकों का योगदान भुलाया नहीं जा सकता है।

जानिए उनके बारे में जिनका कभी नाम नहीं लिया जाता

नवाब सिराजुद्दौला
शेरे-मैसूर टीपू सुल्तान
हज़रत शाह वलीउल्लाह मुहद्दिस देहलवी
हज़रत शाह अब्दुल अज़ीज़ मुहद्दिस देहलवी
हज़रात सयेद अहमद शहीद
हज़रात मौलाना विलायत अली सदिकपुरी
अब ज़फर सिराजुद्दीन मुहम्मद बहादुर शाह ज़फर
अल्लामा फज़ले हक़ खैराबादी
शहज़ादा फ़िरोज़ शाह
मोलवी मुहम्मद बाकिर शहीद
बेगम हज़रत महल
मौलाना अहमदुल्लाह शाह
नवाब खान बहादुर खान
अजीज़न बाई
मोलवी लियाक़त अली अल्लाहाबाद
हज़रत हाजी इमदादुल्लाह मुहाजिर मकई
हज़रत मौलाना मुहम्मद क़ासिम ननोतवी
मौलाना रहमतुल्लाह कैरानवी
शेखुल हिन्द हज़रत मौलाना महमूद हसन
हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह सिंधी
हज़रत मौलाना रशीद अहमद गंगोही
हज़रत मौलाना अनवर शाह कश्मीरी
मौलाना बरकतुल्लाह भोपाली
हज़रत मौलाना किफायतुल्लाह
सुभानुल हिन्द मौलाना अहमद सईद देहलवी
हज़रत मौलाना हुसैन अहमद मदनी
सईदुल अहरार मौलाना मुहम्मद अली जोहर
मौलाना हसरत मोहनी
मौलाना आरिफ हिसवि
मौलाना अबुल कलम आज़ाद
हज़रत मौलाना हबीबुर्रहमान लुधयानवी
सैफुद्दीन कचालू
मसीहुल मुल्क हाकिम अजमल खान
मौलाना मज़हरुल हक़
मौलाना ज़फर अली खान
अल्लामा इनायतुल्लाह खान मशरिक़ी
डॉ.मुख़्तार अहमद अंसारी
जनरल शाहनवाज़ खान
हज़रत मौलाना सयेद मुहम्मद मियान
मौलाना मुहम्मद हिफ्जुर्रहमान स्योहारवी
हज़रत मौलाना अब्दुल बरी फिरंगीमहली
खान अब्दुल गफ्फार खान
मुफ़्ती अतीक़ुर्रहमान उस्मानी
डॉ.सयेद महमूद
खान अब्दुस्समद खान अचकजाई
रफ़ी अहमद किदवई
युसूफ मेहर अली
अशफ़ाक़ उल्लाह खान
बैरिस्टर आसिफ अली
हज़रत मौलाना अताउल्लाह शाह बुखारी
अब्दुल क़य्यूम अंसारी