नीतीश को साथ लाने के लिए कांग्रेस ने कहा…

नई दिल्ली। बिहार में चल रही हिंसा को लेकर मामला गरमाता ही जा रहा हैं. और अब बिहार में हिंसा की आग नवादा तक पहुंच गई हैं इस बीच राजनीति भी इस हिंसा की आग में भभक उठी हैं। और हर कोई अपनी अपनी रोटी इस आग में सेकने की कोशिश कर रहा हैं। और बिहार में आपसी सौहार्द्र का हवाला देकर महागठबंधन को एक बार फिर खड़ा करने के लिए आवाजें उठने लगी हैं। बता दे कि कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी और राजद के विधान पार्षद संजय प्रसाद के बाद अब कांग्रेस विधायक दल के नेता सदानंद सिंह ने भी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को बिहार के हित में सोचने की सलाह दी है।

भाजपा-आरएसएस को सत्ता के दुरुपयोग से रोकना जरूरी हो गया हैं इस तरह की बयानबाजी सदानंद सिंह की ओर से दी गई हैं। उन्होनें कहा हैं कि महागठबंधन का एक बार फिर पुनगर्ठन करना जरूरी हो गया हैं और एक बार सीएम नीतीश कुमार को इस पर गंभीरता से सोचने की जरूरत हैं। बता दे कि सिंह की ओर से कहा गया हैं कि सियासी मजबूरी की वजह से नीतीश कुमार दंगा के दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।

भागलपुर के आरोपी भाजपा नेता गिरफ्तार नहीं हो पा रहे हैं। औरंगाबाद में गिरफ्तार नेता फरार हो जा रहे हैं द जो कि बिहार की छवि के लिए ठीक नहीं हैं और धीरे धीरे सरकार की नकारात्मक छवि बनती है वहीं दूसरी ओर बिहार में साम्प्रदायिक तनाव की लपटें धीरे-धीरे बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने कहा भागलपुर, औरंगाबाद और नालंदा के बाद इस आग की तपिश अब मुंगेर, समस्तीपुर और नवादा तक जा पहुंची है।

सिंह ने कहा कि बिहार दंगों की आग में जलकर खाक हुआ जा रहा हैं और इसका विकास नहीं किया जा सकता हैं। शांति सद्भाव और कानून व्यवस्था किसी शासन की पहली प्राथमिकता होती है। उन्होंने नीरीश कुमार से अपील की है कि वे सरकार के मुखिया होने के नाते समय की मांग के अनुरूप पूर्व के निर्णय पर पुनर्विचार करें।
बिहार कांग्रेस के प्रभारी अध्यक्ष कौकब कादरी ने कहा है कि जदयू को नीरज कुमार जैसे नेता डुबा रहे हैं।

उन्होंने अपने बयान पर जदयू नेता नीरज की टिप्पणी पर कहा कि नीतीश कुमार को महागठबंधन में शामिल होने का निमंत्रण देने वाले वे कौन होते हैं। इसका फैसला आलाकमान को करना है। उन्होंने अपने विचार व्यक्त किए थे। वह भी पार्टी के प्रभारी अध्यक्ष नहीं बल्कि साधारण कार्यकर्ता की हैसियत से। कादरी ने नीरज को सलाह दी है कि वे बोलने के पहले बातों का वजन करना सीखें। अन्यथा उनके जैसे नेता जदयू को डुबो देंगे।  बता दे कि बिहार में हिंसा की आग दिनों दिन फैलती ही जा रही हैं और कई जिलों को अपनी चपेट में ले रही हैं बता दे कि हिंसा की आग ने नीतीश कुमार के सुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।