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जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी पर सीएम योगी आदित्यनाथ सख्त

सीएम योगी ने की वर्चुअल मीटिंग, कोरोना से लड़ने के लिए लिया अहम फैसला

लखनऊ: कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश में कोरोना के संक्रमण से बचाने वाली जीवन रक्षक दवाइयों की कालाबाजारी के कई मामले सामने आए हैं।

हालात ऐसे हैं कि बाजारों में यह दवाइयां उपलब्ध नहीं हो पा रहीं हैं और लोग जमाखोरी में लगे हुए हैं। ऐसे में इन पर शिकंजा कसने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने जीवन रक्षक दवाओं की आपूर्ति की विस्तृत समीक्षा टीम 11 के साथ की और जरूरी निर्देश दिए।

जीवनरक्षक दवाओं के संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश

CM योगी ने टीम-11 की बैठक में रेमडेसिविर इंजेक्शन और फैबीफ्लू जैसी जीवनरक्षक मानी जा रही दवाओं की आपूर्ति की विस्तृत समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग को सख्त निर्देश दिए इन जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी में संलिप्त लोगों के विरुद्ध गैंगस्टर और रासुका जैसे एक्ट के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाए, साथ ही, पुलिस महानिदेशक को इस संबंध में एक विशेष टीम गठित कर प्रदेश में छापा मार कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवनरक्षक दवाओं की निर्बाध आपूर्ति के लिए आवश्यक है कि इसकी लगातार माॅनिटरिंग की जाए। रेमेडेसीवीर उत्पादनकर्ता कंपनियों से लगातार संपर्क में रहें। इसके अलावा, सभी ऑक्सीजन रीफिल केंद्रों पर जिम्मेदार अधिकारियों की तैनाती की जाए। यह सुनिश्चित करें कि ऑक्सीजन का वितरण पारदर्शी ढंग से हो। ऑक्सीजन टैंकर को जीपीएस से जोड़ा जाए तथा प्लांट्स पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया जाए।

रेमडेसिविर इंजेक्शन और फैबीफ्लू की हो रही काला बाज़ारी

कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों के इलाज में जीवन रक्षक मानी जाने वाली रेमडेसिविर इंजेक्शन और फैबीफ्लू की डिमांड बाजार प्रदेश में तेजी से बढ़ गई। हालात ऐसे हो गए हैं कि यह सभी दवाइयों व इंजेक्शन मेडिकल स्टोर से पूरी तरह से गायब हो गए। इसके बाद अपनी वास्तविक कीमत से कई गुना ज्यादा कीमत पर यह दवाइयां मार्केट में कालाबाजारी के तहत बेची जा रही हैं।

कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ी तो गंभीर मरीजों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हुआ। कोरोना संक्रमित गंभीर मरीजों में ये दवाइयां कारगर बतायी जाती हैं। जिसके बाद इन दवाइयों की आवश्यकता काफी तेजी से बढ़ गई। जिसके बाद बाजार में इतनी दवाइयां उपलब्ध नहीं थी, जितनी की मांग तेजी से बढ़ी नतीजा इन दवाइयों की कालाबाजारी बढ़ गई।

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