चिपको आंदोलन को गूगल ने डूडल बनाकर किया याद

नई दिल्ली। भारत में आजादी से पहले से ही कई आंदोलन हुए हैं जो लोग आज भी याद करते हैं एक ऐसा ही आंदोलन हैं चिपको आंदोलन जिसकी आज 45वी सालगिराह हैं और ज गूगल की ओर से चिपको आंदोलन को डूडल बनाकर याद किया जाता हैं। बता दे कि इस आंदोलन की शुरूआत 1970 के दशक में हुई थी।

क्या हैं चिपको आंदोलन
चिपको आदोलंन उत्ताराखंड़ में चलने वाला एक आंदोलन हैं जो 1974 में चलाया गया था इस आंदोलन में लोग पेड़ों को बचाने के लिए लोग पेड़ो से चिपक गए थें इस आदोंलन का मकसद था कि पेड़ो का ना कटने देना इसलिए लोग पेड़ो को बचाने के लिए पेड़ो से चिपक गए थें। बता दे कि इस आंदोलन की जनक गौरी देवी थीं जिन्हें चिपको वूमन के नाम से भी जाना जाता है। गौरा देवी और उनके 21 साथियों ने उन लोगों को समझाने की कोशिश की. जब उन्होंने पेड़ काटने की जिद्द की तो महिलाओं ने पेड़ों से चिपक कर उन्हें ललकारा कि पहले हमें काटो फिर इन पेड़ों को भी काट लेना। इस आंदोलन को करने का मुख्य कारण यें था कि वन विभाग के ठेकेदारों द्रारा पेड़ो की कटाई का काम गांव वालों को छोड बाहर के लोगों को दे दिया गया था जिससे नाराज होकर लोगों ने इसका विरोध किया और विरोध धीरे धीरे चमोली राज्य से चलकर पूरें उत्तराखंड में फैल गया हैं।

आंदोलन के बाद
उत्तराखंड में इस आंदोलन के बाद 1980 में तब एक बड़ी जीत हासिल की, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने प्रदेश के हिमालयी वनों में वृक्षों की कटाई पर 15 सालों के लिए रोक लगा दी थी. बाद के सालों में यह आंदोलन उत्तर में हिमाचल प्रदेश, दक्षिण में कर्नाटक, पश्चिम में राजस्थान, पूर्व में बिहार और मध्य भारत में फैला। ये आंदोलन पेड़ों की कटाई को रोकने में सफल रहा. साथ ही यह लोगों की आवश्यकताओं और पर्यावरण के प्रति अधिक सचेत प्राकृतिक संसाधन नीति के लिए दबाब बनाने में भी सफल रहा। वहीं इस आंदोलन के बाद बात की जाए तो आज भी पेड़ों को धड़ल्ले से काटा जा रहा है।