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चांद पर चीन की अनोखी खोज आपके होश उड़ा देगी..

moon 2 चांद पर चीन की अनोखी खोज आपके होश उड़ा देगी..

जहां एक तरफ चीन से फैले कोरोना ने पूरी दुनिया के लिए चुनौती खड़ी की हुई है तो वहीं दूसरी तरफ चीन ने पड़ोसी मुल्कों की नाक में दम किया हुआ है। जिसकी वजह से चीन की दुनियाभर में कड़े शब्दों में आलोचना हो रही है। लेकिन चीन फिर भी अपनी हरकतों से बाज आता हुआ नहीं दिख रहा है। इस बीच चीन ने चांद को लेकर एक ऐसा खुलासा कर दिया है। जिसने लोगों की आसमान में घटने वाली घटनाओं के प्रति दिलचस्पी बढ़ा दी है।

moon 1 चांद पर चीन की अनोखी खोज आपके होश उड़ा देगी..
आपने चांद की कई सारी तस्वीरें देखी होंगी जिसमें आपको कई सारे गड्डे नजर आते होंगे। लेकिन क्या आपको पता है? चांद की सतह पर एक चिपचिपा पदार्थ भी मौजूद है। जो वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है। लेकिन अब इस रहस्य से चीन ने पर्दा हटा दिया है।आपको बता दें, चीन के यूतू-2 रोवर को गाढ़े हरे रंग का यह पदार्थ पिछले साल मिला था। जिसको लेकर काफी चर्चा भी हुई थी। लेकिन अब इस केमिकल संरचना और उत्पत्ति को लेकर उठ रहे कई सवालों का जवाब मिल गया है। चीन के शोधकर्ताओं का कहना है कि यह दरअसल जैल नहीं बल्कि एक तरह के खनिज जैसा है जो गर्मी में पिघलकर चट्टान सा हो गया है।

यूतू-2 को यह चिपचिपा गाड़ा पदार्थ 110 मील के वॉन कर्मन क्रेटर में मिला था। जो चांद के दूर के हिस्से पर मौजूद है। चाइनीज अकैडमी ऑफ साइंसेज के रिसर्चर्स ने पता लगाया है कि यह पदार्थ जैल नहीं बल्कि कड़ा, कांच जैसा खनिज था जो गलकर ऐसा लगने लगा था। माना जा रहा है कि किसी ऐस्टरॉइड की टक्कर से निकली गर्मी से यह पिघल गया था। और चिप-चिपा पदार्थ बन गया।
चीन की टीम ने पता लगा है कि यह खनिज से बनी एक तरह की चट्टान जैसा है जो किसी बाहरी फोर्स की वजह से सीमेंट जैसी स्थिति में तब्दील हो गया है।

जब यूतू-2 कंट्रोल कर रहे वैज्ञानिकों ने इसे देखा था। यह की मिट्टी से काफी अलग दिख रहा था, इसलिए वैज्ञानिकों का ध्यान इस पर गया। रोवर के कैमरे में यह हरे रंग का जल लग रहा था।जबकि आसपास की मिट्टी सूखी दिखाई दे रही थी। जिसकी वजह से वैज्ञानिकों की उत्सुकता इस पदार्थ को जानने में बढ़ी और अब उन्होंने इसका खुलासा किया है।

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आपको जानकर हैरानी होगी कि, यह हरे रंग का पदार्थ नासा के 15वें और 17वें अपोलो मिशन से लाए गए दो खास नमूनों से मिलता जुलता है। जिसका खुलासा चीन के वैज्ञानिकों के किया है।

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